वाशिंगटन : अमेरिका और उसके पुराने सहयोगी कोलंबिया के बीच कूटनीतिक टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ट्रंप प्रशासन ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो (Gustavo Petro) पर सख्त आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी है। यह फैसला उस वक्त लिया गया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेट्रो पर कोकीन तस्करी को रोकने में “जानबूझकर लापरवाही” बरतने का आरोप लगाया।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति पेट्रो के कार्यकाल में कोलंबिया में कोकीन उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी “बेकाबू” हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रो प्रशासन ने ड्रग कार्टेल्स को “खुली छूट” दे रखी है।
23 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “गुस्तावो पेट्रो न केवल एक विफल नेता हैं, बल्कि अपराधियों के साथी भी हैं। उन्होंने अपने देश को ड्रग माफिया के हवाले कर दिया है।”
स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी नौसेना ने दक्षिण कैरेबियन क्षेत्र में अपनी गतिविधियां तेज कर दीं। संदिग्ध जहाजों पर की गई अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में कोलंबिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ‘एयरस्ट्राइक’ कर निर्दोष लोगों की जान ली है।
राष्ट्रपति पेट्रो, जिनका कार्यकाल अब अंतिम चरण में है, पहले से ही अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के विरोधी रहे हैं। उन्होंने इस बार भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अमेरिका की यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध है। कोलंबिया किसी भी कीमत पर बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।”
कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है और इस कदम को “गंभीर कूटनीतिक हमला” बताया है।
इस बढ़ते तनाव पर ब्राजील और चिली ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि “सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीति ही समाधान है।” वहीं मेक्सिको ने अमेरिका द्वारा कैरेबियन क्षेत्र में एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस जेराल्ड फोर्ड’ की तैनाती को “एकतरफा और असंतुलित कदम” बताया।