दुर्ग :- जिला व सत्र न्यायालय दुर्ग छ.ग. के अधिवक्ता विनोद दुबे ने बताया कि भिलाई दुर्ग के लोहा कारोबारी नितिन रल्हन ने माननीय दुर्ग न्यायालय में शिकायत परिवाद दायर किया कि उन्होंने भरोसे के साथ अपनी कंपनी का से 604 टन स्पंज आयरन माल फनिन्द्र कुमार ठाकुर की कंपनी मेसर्स मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड को इनगोट बनाने के लिए दिया।
इसके लिए अलग से लाखों रुपये भी दिए थे। इस तरह परिवादी एवं आरोपी के मध्य कुल लेनदेन लगभग 1 करोड़ 65 लाख रुपये तक पहुंच गया।जब नितिन ने अपना माल वापस मांगा तो आरोपी ने माल वापस नही दिया ।
परिवादी ने माल के बदले अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी फनिन्द्र ने भुगतान के लिए 25-25 लाख रुपये के पांच चेक दिए। लेकिन जब ये चेक एक्सिस बैंक, भिलाई शाखा में जमा किए गए तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए।
इसके बाद नितिन रल्हन ने अपने अधिवक्ता विनोद दुबे एवं अनुराग ठाकर के माध्यम से अदालत में मामला दर्ज कराया।माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग अंजलि सिंह ने सुनवाई के बाद आरोपी फनिन्द्र कुमार ठाकुर को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी पाया।
अदालत ने फनिन्द्र को 1 साल साधारण कारावास की सजा सुनाई और धारा 357(3) के तहत 2 करोड़ रुपये का प्रतिकर नितिन रल्हन को देने का आदेश दिया।अधिवक्ता विनोद दुबे ने बताया कि नितिन और फनिन्द्र के बीच लंबे समय से लोहे का व्यापार चल रहा था।
आरोपी की कंपनी को कच्चा माल देकर इनगोट बनाने का काम सौंपा गया था लेकिन समय पर भुगतान नहीं किया गया।यह फैसला व्यापारिक जगत के लिए एक बड़ा संदेश है कि बड़े लेन-देन में चेक बाउंस होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अदालत का यह आदेश व्यापार में ईमानदारी और समय पर भुगतान की महत्ता को फिर से याद दिलाता है।