रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली बिल बकाया लगातार बढ़ रहा है, जिससे पावर कंपनी की चिंता बढ़ गई है। कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल बकाया लगभग 7 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें सरकारी विभागों का हिस्सा अकेले 3 हजार करोड़ रुपये है।
सियासी और प्रतिष्ठित संस्थानों की सूची में नाम
हैरानी की बात यह है कि बिजली बकाया सूची में विधानसभा और आईएएस एसोसिएशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। विधानसभा पर 22 लाख 75 हजार रुपये और आईएएस एसोसिएशन पर 64 लाख 35 हजार रुपये बकाया हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, विधानसभा ने आखिरी बार 20 नवंबर 2015 को भुगतान किया था, जबकि आईएएस एसोसिएशन ने 2011 के बाद से कोई भुगतान नहीं किया।
बड़े उपभोक्ताओं के बकाया में लाखों
सामान्य नागरिकों के साथ-साथ बड़े उपभोक्ताओं का भी बकाया भारी है। बृजमोहन अग्रवाल के कनेक्शन पर 13 लाख 32 हजार रुपये, जबकि प्रयास बालक विद्यालय, सड्दू पर 38 लाख 64 हजार रुपये बकाया हैं।
ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति भी चिंताजनक
पंचायतों की बात करें तो कई ग्राम पंचायतों ने पिछले वर्षों में बिजली बिल का भुगतान नहीं किया। उदाहरण के तौर पर, ग्राम पंचायत टेमरी पर 14.63 लाख और ग्राम पंचायत नकटा पर 16.25 लाख रुपये बकाया है।
गैर-घरेलू उपभोक्ताओं से 15.90 करोड़ की वसूली बाकी
प्रदेशभर के 729 गैर-घरेलू उपभोक्ताओं से लगभग 15 करोड़ 90 लाख रुपये की वसूली अभी लंबित है। सबसे ज्यादा बकायादार क्षेत्र बिलासपुर, अंबिकापुर, रायपुर, रायगढ़ और दुर्ग में पाए गए हैं।
सख्त कार्रवाई के लिए स्मार्ट मीटर का सहारा
पावर कंपनी ने बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। स्मार्ट मीटर से तीन बार मैसेज भेजने के बाद भी भुगतान न होने पर कनेक्शन काटे जा रहे हैं। हालांकि, छोटे उपभोक्ताओं पर तत्काल कार्रवाई होती है, वहीं बड़े बकायादारों पर सख्ती अपेक्षाकृत कम नजर आती है।
पावर कंपनी का बयान
कार्यपालक निदेशक (राजस्व) एस. के. ठाकुर ने बताया कि बकाया वसूली का अभियान लगातार जारी है। नोटिस और मैसेज भेजे जा रहे हैं और भुगतान नहीं होने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी विभागों से बकाया वसूली के लिए शासन स्तर पर बातचीत चल रही है।