भिलाई/दुर्ग : भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के हॉस्पिटल सेक्टर में पिछले कई दशकों से रह रहे हजारों निवासियों के आशियानों पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। संपदा न्यायालय द्वारा जारी 15 दिनों के भीतर मकान खाली करने के नोटिस के बाद, बुधवार को बड़ी संख्या में प्रभावित रहवासियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। रहवासियों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या समुचित पुनर्वास के उन्हें हटाना अमानवीय होगा।

4000 लोगों के भविष्य पर तलवार
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में निवासियों ने बताया कि हॉस्पिटल सेक्टर में लगभग 4000 लोग निवास कर रहे हैं, जिनमें मासूम बच्चे, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति और महिलाएं शामिल हैं। संपदा न्यायालय ने 28 मार्च 2026 को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर बलपूर्वक (पुलिस बल के साथ) बेदखली की चेतावनी दी है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बिना किसी छत के सड़क पर आने के विचार मात्र से ही स्थानीय लोग दहशत में हैं।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
रहवासियों का तर्क है कि हॉस्पिटल सेक्टर का यह मामला वर्तमान में माननीय उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। निवासियों का कहना है कि जब तक सर्वोच्च अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक संपदा न्यायालय द्वारा बुलडोजर चलाने या बेदखली की कार्रवाई करना न्यायोचित नहीं है।

पूर्व मंत्रियों की पहल भी रही बेअसर
ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में माननीय मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय और ताम्रध्वज साहू द्वारा इस दिशा में सार्थक पहल की गई थी। संयंत्र प्रबंधन द्वारा 10 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन धरातल पर आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी।
कलेक्टर से भावुक अपील
समस्त हॉस्पिटल सेक्टर वासियों की ओर से सौंपे गए इस पत्र में मांग की गई है कि प्रशासन नगर सेवा विभाग और संपदा न्यायालय को निर्देशित करे कि वे पुलिस बल उपलब्ध न कराएं और बेदखली पर रोक लगाएं। निवासियों ने भावुक होते हुए कहा कि उनके सिर से छत छीनना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनके जीवन का आधार छीनने जैसा है।