दुर्ग/थनोद। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम थनोद में निर्माणाधीन अंडरब्रिज अब विवादों के घेरे में है। परियोजना के डिजाइन और अंडरब्रिज की कम ऊंचाई को लेकर क्षेत्र के किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को बड़ी संख्या में किसानों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम रुकवा दिया और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की।
हार्वेस्टर और मूर्तियों के परिवहन पर संकट
आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि प्रशासन द्वारा यहाँ महज 4 मीटर ऊंचा अंडरब्रिज बनाया जा रहा है, जो व्यावहारिक रूप से बहुत कम है। किसानों के अनुसार, फसल कटाई के समय बड़े हार्वेस्टर, ऊंचे कृषि यंत्र और भारी ट्रॉलियां इस ब्रिज के नीचे से नहीं गुजर पाएंगी। इसके अलावा, गांव की धार्मिक परंपराओं के अनुसार यहाँ प्रदेश भर के लिए मूर्तियों का निर्माण किया जाता है.
जिसके परिवहन में भी यह ब्रिज बाधा बनेगा। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि अंडरब्रिज की ऊंचाई बढ़ाकर कम से कम 5.5 मीटर की जाए।

शिवनाथ नदी की बाढ़ का खतरा
किसानों ने एक और गंभीर तकनीकी खामी की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि सड़क की अत्यधिक ऊंचाई के कारण शिवनाथ नदी का पानी ओवरफ्लो होकर सीधे खेतों में भरेगा। इससे न केवल फसलें बर्बाद होंगी, बल्कि मानसून के दौरान पूरे क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बन जाएगी।

प्रशासनिक हस्तक्षेप और आश्वासन
किसानों के उग्र तेवर और काम रुकने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। एनएचएआई (NHAI) और राजस्व अधिकारियों ने किसानों से चर्चा की। ग्रामीणों के कड़े विरोध को देखते हुए प्रशासन ने मांगों पर तकनीकी विचार करने और सकारात्मक समाधान निकालने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई तो वे फिर से सड़कों पर उतरेंगे।