तेहरान/वॉशिंगटन : पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक इकाई रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपॉर ने स्पष्ट कहा कि ईरान की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अमेरिका को आगाह करते हुए कहा कि कोई भी “गलत आकलन” भारी पड़ सकता है और कार्रवाई के लिए केवल शीर्ष नेतृत्व के आदेश की प्रतीक्षा है।
इस चेतावनी के बीच अमेरिका ने अपने युद्धपोतों की मौजूदगी बढ़ाते हुए यूएसएस अब्राहम लिंकन समेत विमानवाहक पोतों का एक बेड़ा पश्चिम एशिया की ओर रवाना किया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस कदम के जरिए क्षेत्र में दबाव की रणनीति अपना रहा है, ताकि ईरान को किसी संभावित सैन्य कदम से रोका जा सके।
ईरान के भीतर भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 28 दिसंबर से देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड और अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, झड़पों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और हजारों नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। मृतकों में प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
वहीं, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।
हालांकि बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल संयम बरतने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि युद्धपोतों की तैनाती एहतियातन है और उम्मीद है कि उनका इस्तेमाल करने की नौबत न आए।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में दोनों देश एक-दूसरे पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। अमेरिकी थिंक टैंक सूफान सेंटर के अनुसार, फिलहाल कोई सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन हालात बिगड़ने पर सभी विकल्प खुले हुए हैं।