मोबाइल से लेकर चिप तक: भारत तेजी से उभर रहा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन का ग्लोबल हब

नई दिल्ली | दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को ऊर्जा प्रदान करने और तकनीकी परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित करने में इलेक्ट्रॉनिक्स आज एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। यह क्षेत्र न केवल नवाचार का इंजन बन चुका है, बल्कि संचार, स्वचालन और कनेक्टिविटी के नए मानक स्थापित करते हुए समाजों के काम करने, सीखने और जुड़ने के तरीकों को भी बदल रहा है।

पिछले एक दशक में भारत ने इस दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है। देश का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र लगभग छह गुना बढ़ा है और इसके साथ ही 25 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। यह केवल औद्योगिक विस्तार का नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के सशक्त कदमों का प्रतीक है।

500 बिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर भारत

सरकार ने वर्ष 2030-31 तक 500 बिलियन डॉलर के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का विजन तय किया है। यह केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का मिशन है।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों ने इस क्षेत्र में उत्पादन और निर्यात दोनों को गति दी है। उत्पादन-से-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं ने विनिर्माण को लाभदायक और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है।

मोबाइल निर्माण: डिजिटल भारत की रीढ़

भारत में मोबाइल फोन विनिर्माण ने एक तकनीकी क्रांति को जन्म दिया है। आज 85% से अधिक भारतीय परिवारों के पास स्मार्टफोन हैं, जो न केवल संचार बल्कि शिक्षा, बैंकिंग, और शासन सेवाओं तक पहुंच का माध्यम बन चुके हैं।
मोबाइल कनेक्टिविटी अब डिजिटल सशक्तिकरण की रीढ़ बन चुकी है — जिससे भारत दुनिया के सबसे अधिक जुड़े समाजों में शामिल हो गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स: हर उद्योग की जीवनरेखा

इलेक्ट्रॉनिक्स आज हर प्रमुख उद्योग की धड़कन है —
घर, अस्पताल, फैक्ट्री या वाहन, हर जगह इसका योगदान अनिवार्य है।
यह क्षेत्र दक्षता, सुरक्षा और नवाचार को संभव बनाता है। कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर नज़र डालें —

  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स: टीवी, एसी, रेफ्रिजरेटर और स्मार्ट उपकरण अब हर घर का हिस्सा हैं, जो जीवन को अधिक आरामदायक और आधुनिक बना रहे हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक घटक: हर डिवाइस का आधार — चाहे वह रक्षा प्रणाली हो या चिकित्सा उपकरण — यही घटक उन्हें शक्ति देते हैं।
  • ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स: इलेक्ट्रिक और स्मार्ट वाहनों के युग में सेंसर, इंफोटेनमेंट और सुरक्षा प्रणाली का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
  • चिकित्सा इलेक्ट्रॉनिक्स: ग्लूकोमीटर, ऑक्सीमीटर और डिजिटल मॉनिटर जैसे उपकरण स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, सटीक और किफायती बना रहे हैं।
  • स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, सटीक और किफायती बना रहे हैं।

सरकारी नीतियाँ: विकास की मजबूत नींव

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर आज जिन ऊँचाइयों पर पहुँचा है, उसके पीछे ठोस नीतिगत आधार और सरकारी पहलों की बड़ी भूमिका रही है।

  1. उत्पादन-से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना:
    1.97 लाख करोड़ रुपये की यह योजना 14 प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती है। इसके तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने और निर्यात विस्तार के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। वर्ष 2020-21 से अब तक भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में 4 बिलियन डॉलर से अधिक FDI आकर्षित किया है, जिसमें लगभग 70% निवेश पीएलआई लाभार्थियों से आया है।
  2. एसपीईसीएस (SPECS) योजना:
    इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए यह योजना पूंजीगत व्यय पर 25% वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। इससे भारत असेंबली आधारित उद्योग से आगे बढ़कर उच्च-मूल्य विनिर्माण की ओर बढ़ रहा है।
  3. ईसीएमएस (ECMS) योजना:
    मई 2025 में स्वीकृत इस योजना में 22,919 करोड़ रुपये का प्रावधान है। 249 कंपनियों ने इसमें आवेदन किया, जो उद्योग जगत की गहरी रुचि को दर्शाता है।
    • अनुमानित निवेश: ₹1,15,351 करोड़
    • अनुमानित उत्पादन: ₹10,34,700 करोड़
    • अनुमानित रोजगार: 1,42,000 प्रत्यक्ष + लाखों अप्रत्यक्ष

यह योजना 2030-31 तक 500 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने में भारत की गति को और तेज़ करेगी।

  1. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2019:
    इस नीति का लक्ष्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) के लिए वैश्विक हब बनाना है। नीति नवाचार, अनुसंधान एवं विकास और डिज़ाइन-आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देती है।

नवाचार से आत्मनिर्भरता की ओर

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल निर्माण क्षेत्र आज वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। PLI, ECMS और SPECS जैसी योजनाओं के जरिये देश ने न केवल घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित किया है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत कर और रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं।
‘राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति’ और ‘मेक इन इंडिया’ के संयोजन से भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार का निर्माता बनकर उभर रहा है।

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