नेशनल डेस्क: अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और अमेरिकी नीतिगत फैसलों के प्रभाव से भारत में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। देश के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड अपने उच्चतम स्तर से करीब 13,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है — यानी लगभग 10% की गिरावट। अब निवेशकों के सामने यह बड़ा सवाल है कि क्या यह सही समय है बाजार से बाहर निकलने का, या फिर कुछ समय और निवेश बनाए रखना समझदारी होगी?
13 हजार की गिरावट से हिला सोने का बाजार
MCX पर सोने का भाव अपने अब तक के उच्चतम स्तर ₹1,32,294 प्रति 10 ग्राम से फिसलकर बुधवार को ₹1,19,351 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। यानी निवेशकों को हाल के महीनों में करीब ₹12,943 रुपये की गिरावट का सामना करना पड़ा है। इस अचानक आई गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
अमेरिकी फेड और वैश्विक घटनाओं का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की मौजूदा कमजोरी अस्थायी हो सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित कटौती और अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता के परिणाम सोने की दिशा तय करेंगे।
जहां ब्याज दरों में कमी से सोने को सहारा मिल सकता है, वहीं वैश्विक व्यापार में सुधार की खबरें कीमतों पर दबाव डाल रही हैं।
घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव जारी
देश के वायदा बाजार में बुधवार को शुरुआती गिरावट के बाद सोने में एक बार फिर तेजी देखी गई। कारोबारी सत्र के दौरान कीमतों में ₹1,000 से अधिक का उछाल आया।
पृथ्वी फिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन का कहना है कि सोना अभी ₹1,17,000–₹1,18,000 के स्तर पर सपोर्ट पा रहा है, जबकि ₹1,20,500–₹1,21,400 पर रेसिस्टेंस बना हुआ है। अगर यह रेंज कायम रहती है तो सोना जल्द ₹1,21,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक रिकवरी कर सकता है।
चांदी के लिए सकारात्मक अनुमान
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी में आने वाले महीनों में तेजी की संभावना अधिक है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका भाव ₹1,47,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
LKP सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि सोने की कीमतें फिलहाल वैश्विक संकेतों पर निर्भर हैं। फेड की अगली बैठक और अमेरिका-चीन शिखर वार्ता के बाद ही ट्रेंड स्पष्ट होगा।
उन्होंने कहा — “जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट एक बेहतर खरीदारी का अवसर हो सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव से सतर्क रहना जरूरी है।”