Gold Rate : सोना और चांदी की कीमतों में इस महीने रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद वैश्विक बाजार में अचानक गिरावट देखने को मिली है। मंगलवार और बुधवार को वैश्विक स्तर पर सोना और चांदी में भारी गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले कई वर्षों में सबसे तेज मुनाफाखोरी का संकेत है। भारत में बाजार दिवाली और बलिप्रतिपदा के चलते बंद हैं, लेकिन 23 अक्टूबर से जब व्यापार पुनः शुरू होगा, तो घरेलू बाजार में भी नरमी का असर दिख सकता है।
वैश्विक बाजार में गिरावट
बुधवार को सोना 2.9% गिरकर 4,004 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि मंगलवार को यह 6.3% नीचे गया था। यह पिछले दशक में सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है। चांदी में भी मुनाफाखोरी की लहर के कारण कमजोरी देखी गई; बुधवार को चांदी की कीमत लगभग 47.6 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो पिछले दिन की तुलना में 2% से अधिक कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक महीनों की रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद मुनाफा निकाल रहे हैं। केसीएम ट्रेड के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वाटरर ने कहा, “सोने के बाजार में पहले कभी न देखी गई ऊंचाई ने निवेशकों को मुनाफाखोरी के लिए प्रेरित किया।”
भारत में कल की संभावनाएँ
भारतीय बाजार 23 अक्टूबर से खुलेंगे, और व्यापारियों का अनुमान है कि सोना और चांदी के वायदे कम स्तर पर खुल सकते हैं। एमसीएक्स पर दिसंबर का सोना वायदा 1,28,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो पिछले बंद भाव से 271 रुपये या 0.21% कम है। वहीं, चांदी का वायदा भाव 327 रुपये या 0.22% घटकर 1,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है।
गिरावट के कारण
विश्लेषकों के अनुसार, इस अल्पकालिक गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित व्यापार समझौते की उम्मीद ने भी सुरक्षित-हेवन (safe haven) की मांग को कमजोर किया। निवेशक सितंबर अमेरिकी CPI डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर निर्णयों की दिशा तय करेगा। बाजार में उम्मीद है कि दिसंबर में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती हो सकती है।
भविष्य का रुझान
अल्पावधि में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और कमजोर डॉलर के कारण मध्यम अवधि में सोना-चांदी की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी। त्योहारी सीजन में भौतिक मांग बढ़ने से भी बाजार को सहारा मिल रहा है।
निवेशकों के लिए सुझाव
भारतीय निवेशकों के लिए यह समय महत्वपूर्ण है। इस साल की जबरदस्त तेजी अब जारी रहने की संभावना कम है, लेकिन दीर्घकालिक कारक जैसे भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंक की खरीदारी और कम ब्याज दरों की उम्मीद बनी रहेगी। धातुओं में निवेश रखने वाले निवेशकों को एमसीएक्स खुलने पर संभावित नुकसान के लिए तैयार रहना चाहिए। वहीं, अल्पकालिक गिरावट को समझदारी से अवसर में बदला जा सकता है।