मुंबई। राज्य में घटिया और नकली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) मंत्री नरहरी जिर्वाल ने राज्य विधानसभा में बताया कि एफडीए ने खांसी की सिरप और अन्य दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष ड्राइव शुरू कर दिया है।
नमूनों की जांच में सामने आई खामियां
मंत्री जिर्वाल ने भाजपा विधायक अमित सताम और अन्य सदस्यों के सवालों का लिखित उत्तर देते हुए बताया कि बड़ी संख्या में दवा नमूने सरकारी अस्पतालों और ड्रग टेस्टिंग प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि की गई, जिसके बाद तत्काल एक्शन लिया गया।
176 रिटेल और 39 होलसेल लाइसेंस रद्द
एफडीए की कार्रवाई के तहत 176 दवा दुकानों और 39 थोक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। इसके अलावा 136 रिटेल और 93 होलसेल प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इस दौरान कई जगहों से नकली खांसी की सिरप और संदिग्ध दवाएं बरामद की गईं।
डॉक्टर्स और फार्मासिस्टों को निर्देश
मंत्री ने बताया कि डॉक्टरों, निजी क्लिनिक और फार्मासिस्टों को सलाह दी गई है कि वे प्रोप्रानोलोल युक्त दवाएं न लिखें और न बेचें। मुंबई, ठाणे, पुणे, औरंगाबाद और नागपुर में लिए गए 36 नमूनों की जांच में 34 नमूने निर्धारित मानकों से कम पाए गए। इनमें हाई BP, डायबिटीज, टीबी, कार्डियक बीमारी और ब्लड प्यूरीफिकेशन से संबंधित दवाएं शामिल थीं।
बच्चों की सिरप के नमूने भी फेल
जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों के लिए बिकने वाली एक ब्रांडेड खांसी की सिरप के 6 नमूने गुणवत्ता परीक्षण में असफल रहे। कई मामलों में दवा के घटक बदलकर या मिलाकर नए नाम से मार्केट में बेचे जा रहे थे, जबकि कुछ दवाएं अनाधिकृत कंपनियों के माध्यम से सरकारी अस्पतालों तक पहुंचीं।
स्टाफ की कमी से निगरानी प्रभावित
एफडीए मंत्री ने कहा कि विभाग में ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी भी चुनौती है। कुल 176 पद खाली हैं, जिससे कई जिलों में नियमित निरीक्षण प्रभावित होता है। वर्तमान में मुंबई, नागपुर और पुणे स्थित तीन टेस्टिंग लैब को आधुनिक उपकरणों से अपग्रेड किया जा रहा है। सरकार ने एमपीएसी के माध्यम से 109 नए ड्रग इंस्पेक्टरों की भर्ती का निर्णय लिया है।
सरकार की कार्रवाई जारी
मंत्री जिर्वाल के अनुसार, उपलब्ध संसाधनों के साथ एफडीए लगातार निरीक्षण कर रहा है। संदिग्ध दवाओं के नमूने लैब भेजे जाते हैं और नकली/अनधिकृत दवाओं के मामले अदालत में ले जाए जाते हैं, ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।