दुर्ग। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और रंग पंचमी के अवसर पर अभिभाषक साहित्य संसद दुर्ग की ओर से एक भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी ददरिया संग्रह ‘गांव मया के चलव बसाबो’ की लेखिका सुमित्रा कामड़िया का सम्मान किया गया और उनकी पुस्तक पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र में ददरिया संग्रह पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान छत्तीसगढ़ी ब्लॉगर संजीव तिवारी ने पुस्तक की विषयवस्तु और साहित्यिक महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में रंग पंचमी के अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों और प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही कवियों ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बना दिया।

कार्यक्रम में कवि अचानक गोरखपुरी, प्रशांत जोशी, पुष्पलता साहू, मानस मर्मज्ञ अभयराज सिंह, योगिता सिंह ललखेर, रमा श्रीवास्तव, कमलनारायण कामड़िया, गीतकार व कवि लक्ष्मी नारायण कुंभकार, अनुराधा बक्शी, अनु समीर त्रिपाठी और वरिष्ठ अभिभाषक सुधीर तिवारी ने अपनी-अपनी विधा में काव्य पाठ कर उपस्थित लोगों को हंसाते हुए होली के रंग में सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक पवन गुप्ता और उनके सहयोगी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध बांसुरी वादक शिव नारायण कामड़िया ने अपनी मधुर बांसुरी की धुन से सभी का मन मोह लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अभिभाषक साहित्य संसद दुर्ग के अध्यक्ष आर.एस. यादव (एडवोकेट) ने की, जबकि रंगकर्मी योगेश पांडेय ने कार्यक्रम का रंगीन संचालन किया।