हरी या लाल या पीली? जानिए शिमला मिर्च के तीनों रंगों के फायदे और किसे डाइट में करें शामिल

Healthy Vegetables : भारतीय रसोई में शिमला मिर्च अब एक आम लेकिन खास सब्जी बन चुकी है। नूडल्स, पिज्जा, पनीर टिक्का, चाउमीन या मिक्स वेज—हर डिश में इसका रंग और कुरकुरापन स्वाद को बढ़ा देता है। दरअसल शिमला मिर्च, जिसे अंग्रेज़ी में बेल पेपर या कैप्सिकम कहा जाता है, मूल रूप से दक्षिण अमेरिका की फसल है, लेकिन अब भारत में भी बड़े पैमाने पर उगाई जाती है।

बाजार में हरी, लाल, पीली, नारंगी और कभी-कभी बैंगनी या काली शिमला मिर्च भी देखने को मिलती है। इन रंगों का फर्क सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके पोषक तत्व भी अलग-अलग होते हैं। आइए समझते हैं किस रंग की शिमला मिर्च किस मामले में आगे है।

हरी शिमला मिर्च

हरी शिमला मिर्च सबसे कम पकी हुई अवस्था होती है। इसमें विटामिन C, विटामिन A, फोलेट और पोटैशियम अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें क्लोरोफिल अधिक होने से स्वाद हल्का कड़वा या तीखा लग सकता है। यह पाचन के लिए फायदेमंद मानी जाती है और रोजमर्रा की सब्जियों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है।

 लाल शिमला मिर्च

लाल शिमला मिर्च पूरी तरह पकी हुई अवस्था है और पोषण के मामले में सबसे समृद्ध मानी जाती है। इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन A और विटामिन C की मात्रा काफी अधिक होती है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह इम्यूनिटी बढ़ाने और त्वचा व आंखों की सेहत के लिए लाभकारी है। स्वाद में यह ज्यादा मीठी होती है।

पीली शिमला मिर्च

पीली शिमला मिर्च स्वाद में हल्की मीठी और कम तीखी होती है। इसमें विटामिन C अच्छी मात्रा में मिलता है, हालांकि विटामिन A लाल मिर्च से कम होता है। इसमें मौजूद कैरोटीनॉयड्स आंखों की रोशनी और रेटिना की सुरक्षा में सहायक होते हैं।

नारंगी शिमला मिर्च

नारंगी रंग बीटा कैरोटीन की वजह से आता है। यह आंखों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती है और शरीर में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि को बढ़ाती है। इसका स्वाद भी हल्का मीठा होता है।

काली या बैंगनी शिमला मिर्च

इनमें एंथोसायनिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। ये किस्में अपेक्षाकृत कम मिलती हैं लेकिन पोषण के लिहाज से खास मानी जाती हैं।

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