गुवाहाटी बनेगा वस्त्र नीति का राष्ट्रीय मंच, 8 जनवरी से दो दिवसीय सम्मेलन में तय होगा 2030 का विज़न

भारत के वस्त्र क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए 8 जनवरी से असम की राजधानी गुवाहाटी में राष्ट्रीय स्तर का एक अहम सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। वस्त्र मंत्रालय और असम सरकार की साझेदारी से होने वाले इस दो दिवसीय आयोजन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वस्त्र मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक मंच पर जुटेंगे।

इस सम्मेलन को “भारत का वस्त्र उद्योग: विकास, विरासत और नवाचार का संगम” थीम के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसका मकसद परंपरा और आधुनिकता को जोड़ते हुए वस्त्र क्षेत्र के भविष्य की रणनीति तैयार करना है।

2030 के लक्ष्य को लेकर व्यापक मंथन

सम्मेलन के एजेंडे में वस्त्र नीति, निवेश आकर्षण, निर्यात बढ़ाने, पर्यावरणीय स्थिरता, आधारभूत ढांचे और तकनीकी उन्नयन जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को वर्ष 2030 तक वैश्विक वस्त्र विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है, और यह सम्मेलन उसी दीर्घकालिक सोच के अनुरूप एक ठोस रोडमैप तैयार करने का प्रयास है। रोजगार सृजन और समावेशी विकास को भी चर्चा के केंद्र में रखा गया है।

उद्घाटन समारोह में केंद्रीय और राज्य नेतृत्व की मौजूदगी

8 जनवरी 2026 को होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और वस्त्र राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल होंगे। इस अवसर पर भारतीय वस्त्र उद्योग की विविधता, नवाचार क्षमता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली विशेष प्रदर्शनी और पवेलियन का शुभारंभ भी किया जाएगा।

नीति से नवाचार तक, कई अहम सत्र

सम्मेलन में निवेश और अवसंरचना, वस्त्र निर्यात का विस्तार, कच्चे माल और रेशों की उपलब्धता, टेक्निकल टेक्सटाइल, नए युग के फाइबर, हथकरघा और हस्तशिल्प के संरक्षण जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही पीएम मित्रा पार्क, पर्यावरणीय मानकों, नवाचार और एकीकृत वैल्यू-चेन विकास जैसी सरकारी पहलों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

राज्यों के अनुभव बनेंगे साझा ताकत

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में अपनाई गई सफल नीतियों, सामने आई चुनौतियों और सुधार के सुझावों को साझा करेंगे। इससे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूती मिलने के साथ-साथ कपड़ा मूल्य श्रृंखला को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

उत्तर-पूर्व पर विशेष फोकस

सम्मेलन के पहले दिन उत्तर-पूर्वी भारत के वस्त्र क्षेत्र को समर्पित एक विशेष सत्र भी आयोजित किया जाएगा। इसमें क्षेत्र के रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प और बांस आधारित वस्त्रों की संभावनाओं पर चर्चा होगी। एरी, मूगा और शहतूत रेशम, महिला उद्यमिता, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।

नीति से क्रियान्वयन तक की उम्मीद

राष्ट्रीय वस्त्र मंत्रियों का यह सम्मेलन न केवल विचार-विमर्श का मंच बनेगा, बल्कि एक ऐसे वस्त्र क्षेत्र की दिशा तय करने में मदद करेगा जो प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ टिकाऊ और समावेशी भी हो। केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से इस आयोजन से एक स्पष्ट और व्यावहारिक कार्ययोजना सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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