विकास के नाम पर उजाड़ा आशियाना,अब नारकीय जीवन जीने को मजबूर संजय नगर के लोग

भिलाई : भिलाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 6, संजय नगर श्रमिक बस्ती से निगम प्रशासन की संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ नाला और सड़क निर्माण के नाम पर करीब 15-20 दिन पहले गरीब परिवारों के घरों के कुछ हिस्सों पर बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की गई थी। कार्रवाई के इतने दिन बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे पूरी बस्ती टापू में तब्दील हो गई है।

सांप-बिच्छू का बना बसेरा, दहशत में परिवार

स्थानीय निवासियों का कहना है कि घर टूटने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही पक्का नाला और सड़क बन जाएगी, जिससे उनकी समस्या दूर होगी। लेकिन फिलहाल स्थिति इसके उलट है। अधूरा खुदा हुआ नाला अब बीमारियों और हादसों का केंद्र बन गया है। नाले की गंदगी और बदबू से बस्ती का माहौल खराब हो रहा है। सबसे डरावनी बात यह है कि खुले नाले से जहरीले सांप, बिच्छू और कीड़े-मकोड़े सीधे लोगों के घरों में घुस रहे हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर महिलाएं दिन-रात दहशत में हैं।

असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, प्रशासन मौन

बस्ती की महिलाओं ने आरोप लगाया कि सड़क और नाले का काम बंद होने के कारण आवाजाही बाधित है, जिसका फायदा उठाकर रात के समय असामाजिक तत्व यहाँ सक्रिय हो जाते हैं। चोरी और लूटपाट की आशंका से लोग रात भर सो नहीं पा रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने वार्ड पार्षद से लेकर नगर निगम के अधिकारियों और यहाँ तक कि कलेक्टर कार्यालय में भी गुहार लगाई है, लेकिन अब तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली है।

जनता का सवाल: हमारा कसूर क्या

संजय नगर के श्रमिकों का सवाल है कि यदि निर्माण कार्य तुरंत शुरू नहीं करना था, तो उनके आशियाने क्यों उजाड़े गए? एक तरफ घर टूटने का गम और दूसरी तरफ नरक जैसी जिंदगी, प्रशासन की इस कार्यप्रणाली ने गरीब परिवारों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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