रातों-रात सड़कों पर उतरे सैकड़ों बांग्लादेशी, भारत के खिलाफ नारेबाजी, जानिए क्या है पूरा मामला

ढाका | बांग्लादेश में अचानक बिगड़े हालात और बढ़ती अशांति के बीच भारत ने एहतियाती कदम उठाते हुए राजशाही और खुलना में स्थित भारतीय वीज़ा आवेदन केंद्रों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह निर्णय मौजूदा सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जिन आवेदकों ने 18 दिसंबर के लिए अपॉइंटमेंट तय कर रखे थे, उन्हें नई तारीख लेने की सलाह दी गई है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब बांग्लादेश के कई शहरों में भारत विरोधी प्रदर्शनों ने जोर पकड़ लिया है। राजशाही में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने भारतीय असिस्टेंट हाई कमीशन की ओर कूच करने की कोशिश की। हालात को संभालने के लिए सुरक्षा बलों ने बैरिकेड्स लगाए, लेकिन लगातार दूसरे दिन हुए विरोध प्रदर्शनों ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है।

दरअसल, यह उबाल एक प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देखने को मिला। हादी पर पिछले सप्ताह जानलेवा हमला हुआ था, जिसके बाद इलाज के दौरान सिंगापुर में उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद गुरुवार देर रात और शुक्रवार तड़के ढाका समेत कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और न्याय की मांग करने लगे। देखते ही देखते यह प्रदर्शन राजधानी से बाहर भी फैल गया।

प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ भारत विरोधी नारे लगाए, बल्कि भारतीय राजनयिक परिसरों की ओर मार्च करने की कोशिश की। कई जगहों पर पूर्व सत्ताधारी अवामी लीग से जुड़ी संपत्तियों को भी निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भारतीय असिस्टेंट हाई कमीशन के आसपास पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आई हैं।

इस बीच, प्रदर्शन कर रहे कुछ नेताओं ने अंतरिम सरकार पर दबाव बनाते हुए मांग की है कि जब तक कथित आरोपियों को वापस नहीं लाया जाता, तब तक भारतीय उच्चायोग को बंद किया जाए। इससे हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

उधर, भारत में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौजूदा अंतरिम नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में देश को अस्थिरता की ओर धकेला जा रहा है और राजनीतिक वैधता हासिल करने के लिए पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाई जा रही हैं। हसीना ने कहा कि अंतरिम सरकार के पास न तो जनादेश है और न ही कूटनीतिक अनुभव।

शेख हसीना ने बांग्लादेश में चल रही कानूनी कार्रवाइयों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके खिलाफ सुनाई गई सजा और पार्टी पर लगाया गया प्रतिबंध एकतरफा और राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला है।

इधर, चुनाव की घोषणा के बाद से देश में हिंसा का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। ताजा घटना ढाका के हजारीबाग इलाके की है, जहां एक महिला छात्रावास में नेशनल सिटीजन पार्टी की युवा नेता जन्नत आरा रूमी की मौत हो गई। इस घटना ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बांग्लादेश में जल्द हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर न केवल आंतरिक स्थिरता पर पड़ेगा, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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