नई दिल्ली : नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रनिर्माण की विरासत को नए सिरे से स्मरण करने का अवसर दिया। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारि (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा पहले स्थापित ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटिएन्स की मूर्ति के स्थान पर लगाई गई है।
समारोह में राष्ट्रनिर्माण में राजाजी की भूमिका को विस्तार से रेखांकित किया गया। उन्हें एक दूरदर्शी चिंतक, प्रखर प्रशासक और सिद्धांतनिष्ठ नेता के रूप में याद किया गया, जिन्होंने सत्ता को हमेशा सेवा का माध्यम माना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर को देश के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ‘राजाजी उत्सव’ जैसी पहलें नई पीढ़ी को भारत के महान नेताओं के विचारों और मूल्यों से जोड़ती हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस आयोजन और प्रदर्शनी के माध्यम से राजाजी के जीवन, उनके आदर्शों और योगदान को समझें।
प्रधानमंत्री ने अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी इस बात पर जोर दिया था कि देश अब औपनिवेशिक मानसिकता से आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्राथमिकता दे रहा है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह उत्सव उसी सोच को साकार करता है।
‘राजाजी उत्सव’ के अंतर्गत एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें उनके सार्वजनिक जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका और प्रशासनिक योगदान से जुड़ी दुर्लभ सामग्री प्रदर्शित की गई है। यह प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी।