नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 8.2 प्रतिशत की मजबूत विकास दर हासिल की है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की 5.6 प्रतिशत दर से काफी ऊपर है। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार को साझा की।
इस परिणाम के साथ वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में औसत GDP वृद्धि दर 8 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 6.1 प्रतिशत थी। मंत्रालय ने बताया कि इस अवधि में नॉमिनल GDP में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
सरकार के अनुसार, इस तेज वृद्धि का मुख्य कारण द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन रहा। वित्त वर्ष 2026 की Q2 में:
- द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत रही, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग 9.1% और निर्माण क्षेत्र 7.2% पर पहुँचा।
- तृतीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत रही, जिसमें वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं ने 10.2 प्रतिशत की बढ़त दिखाई।
- कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि रही।
- बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य यूटिलिटी सेवाओं में 4.4 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
वहीं, निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) में 7.9 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE) में 2.7 प्रतिशत की गिरावट रही।
निर्यात में जुलाई-सितंबर अवधि में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि आयात में 12.8 प्रतिशत का उछाल देखा गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में निर्यात 3 प्रतिशत और आयात मात्र 1 प्रतिशत बढ़ा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों की मजबूती और निजी खपत में तेजी ने इस आर्थिक वृद्धि को मुख्य रूप से आगे बढ़ाया है।