यमन में फांसी से बची भारतीय नर्स, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- AG के बयान ने दी उम्मीद

नई दिल्ली | उच्चतम न्यायालय को शुक्रवार को सूचित किया गया कि यमन में हत्या के आरोप में मृत्युदंड पाए भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और उसे किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ रहा। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि इस मामले में एक नया मध्यस्थ सामने आया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “फांसी की स्थिति क्या है?” याचिकाकर्ता संगठन ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ की ओर से पेश वकील ने कहा कि फिलहाल फांसी पर रोक है और प्रिया को कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं हुई है। वेंकटरमणी ने कहा, “एक नया मध्यस्थ सामने आया है। एकमात्र सकारात्मक पहलू यह है कि प्रिया सुरक्षित है।” कोर्ट ने मामले की सुनवाई जनवरी 2026 के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और आवश्यक होने पर पक्षकारों को शीघ्र सुनवाई का विकल्प भी रखा।

फांसी 16 जुलाई को होनी थी
नर्स को बचाने के लिए उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को राजनयिक माध्यमों का उपयोग करने के लिए निर्देश देने की याचिका पर सुनवाई की। प्रिया को 2017 में अपने यमनी व्यापारिक साझेदार की हत्या का दोषी पाया गया था। 2020 में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया और 2023 में अंतिम अपील खारिज हो गई। केरल के पलक्कड़ की रहने वाली प्रिया यमन की राजधानी सना की जेल में बंद है।

‘ब्लड मनी’ के जरिए माफी का विकल्प
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि शरिया कानून के तहत मृतक के परिवार को ‘ब्लड मनी’ देने पर विचार किया जा सकता है। यदि मृतक का परिवार इसे स्वीकार कर लेता है तो प्रिया को माफ किया जा सकता है। भारत सरकार ने 17 जुलाई को कहा था कि वह यमन के अधिकारियों और कुछ मित्र देशों के साथ इस मामले में पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने के प्रयास में है।

इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि यमन में फांसी की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित है और भारतीय नर्स को सुरक्षित रूप से न्यायिक एवं राजनयिक प्रक्रिया के माध्यम से बचाने के प्रयास जारी हैं।

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