नई दिल्ली | भारत अपने स्वदेशी डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में पूर्वी एशिया के देश इस विस्तार योजना के केंद्र में रहेंगे।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक वित्तीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए नागराजू ने कहा कि UPI ने भारत में डिजिटल लेनदेन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। वर्तमान में देश में होने वाले कुल डिजिटल भुगतान का लगभग आधा हिस्सा UPI के माध्यम से पूरा हो रहा है, जो इसकी लोकप्रियता और भरोसे को दर्शाता है।
वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता UPI
उन्होंने बताया कि सरकार अब इस तकनीकी सफलता को भारत की सीमाओं से बाहर ले जाकर एक वैश्विक डिजिटल भुगतान समाधान के रूप में स्थापित करना चाहती है। अभी UPI के जरिए 8 देशों में लेनदेन संभव है, जिनमें एशिया, मध्य-पूर्व और यूरोप के कुछ देश शामिल हैं। इससे विदेश यात्रा के दौरान भारतीय नागरिकों को नकदी या अंतरराष्ट्रीय कार्ड पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
तेजी से बढ़ रहे लेनदेन
DFS सचिव के अनुसार, UPI का उपयोग निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। दिसंबर 2025 में ही UPI के माध्यम से 21 अरब से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए, जो डिजिटल भुगतान में भारत की अग्रणी स्थिति को दर्शाता है।
जनधन योजना बनी आधार
नागराजू ने डिजिटल भुगतान के इस विस्तार का श्रेय प्रधानमंत्री जनधन योजना को भी दिया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर बैंक खातों के खुलने से न केवल वित्तीय समावेशन बढ़ा है, बल्कि खातों में औसत जमा राशि में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
एनपीसीआई निभा रहा है अहम भूमिका
UPI का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा किया जाता है, जो देश की प्रमुख खुदरा भुगतान प्रणालियों का प्रबंधन करता है। यह संस्था भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ के सहयोग से कार्य कर रही है।
सूक्ष्म उद्यमों के विकास पर भी जोर
डिजिटल भुगतान के साथ-साथ नागराजू ने देश के सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जब छोटे कारोबारों को बाजार, तकनीक और आधुनिक संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, तभी वे मध्यम और बड़े उद्यमों के रूप में विकसित हो सकेंगे।