लंदन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता देश के आर्थिक हितों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है।
स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन अपनी सेना को ऐसे किसी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनाएगा जो सीधे तौर पर उसके राष्ट्रीय हितों से जुड़ा न हो। उन्होंने बताया कि सरकार का ध्यान देश के लोगों पर बढ़ते खर्च और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टार्मर ने कहा कि इस तरह की चेतावनियां केवल दबाव बनाने की कोशिश हैं। उन्होंने दोहराया कि नाटो दुनिया का सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन है और ब्रिटेन इसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मध्य पूर्व में हालात को देखते हुए ब्रिटेन ने कूटनीतिक पहल भी शुरू की है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस सप्ताह के अंत में होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्ग को सुचारु करने के लिए कई देशों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता ब्रिटेन की गृह मंत्री यवेट कूपर करेंगी, जिसमें जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, फंसे नाविकों की सुरक्षा और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
ब्रिटेन का कहना है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगभग 35 देशों के साथ समन्वय स्थापित किया है। सरकार का मानना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने और होर्मुज मार्ग के सामान्य होने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे आम लोगों को भी राहत मिल सकती है।