नई दिल्ली: फारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कतर के प्रमुख गैस निर्यात केंद्र रस लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला होने की खबर सामने आई है। यह इलाका दुनिया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात ठिकानों में गिना जाता है और यहां से वैश्विक गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भेजा जाता है। हालिया हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।
कतर के अधिकारियों के मुताबिक बुधवार देर रात कई मिसाइलें इस क्षेत्र की ओर दागी गईं। इनमें से अधिकांश को वायु रक्षा प्रणाली ने रास्ते में ही नष्ट कर दिया, लेकिन एक मिसाइल औद्योगिक परिसर के भीतर गिर गई। हालांकि संभावित खतरे को देखते हुए पहले ही प्लांट को खाली करा लिया गया था, जिससे किसी भी कर्मचारी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने की घटना के बाद आपात दलों ने मौके पर पहुंचकर हालात पर काबू पाया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को गंभीर उकसावे की कार्रवाई बताते हुए इसे देश की संप्रभुता का उल्लंघन कहा है। इसके जवाब में कतर ने ईरान से जुड़े कुछ सैन्य और राजनयिक अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले से पहले ही क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ था। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई थीं, जिससे गैस और तेल के परिवहन पर भी असर पड़ा था। इसी कारण कई ऊर्जा कंपनियों ने अस्थायी रूप से उत्पादन और आपूर्ति पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए।
ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक कतर के इस गैस हब में किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजार पर तुरंत पड़ता है। खासतौर पर एशिया और यूरोप जैसे क्षेत्र आयातित एलएनजी पर काफी निर्भर हैं, इसलिए आपूर्ति में कमी से बिजली उत्पादन और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
इस बीच सुरक्षा चिंताओं के चलते अबू धाबी में स्थित हबशान गैस प्लांट को भी एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। बताया गया है कि आसपास हुए हमलों के मलबे से संयंत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका थी, हालांकि किसी प्रकार की जनहानि की खबर नहीं है।
खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और Brent Crude Oil के दाम करीब 8 प्रतिशत बढ़कर लगभग 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां इसी तरह जारी रहीं, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।