सांस लेना हुआ मुश्किल: दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा में घुला ज़हर

दिल्ली | दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा फिर ज़हरीली हो गई है। राजधानी में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक श्रेणी में पहुंचता जा रहा है, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं। सुबह और शाम के वक्त हवा में घनी धुंध की परत छाई रहती है, जिसने शहर की वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार सुबह आठ बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 367 दर्ज किया गया, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। आनंद विहार में स्थिति सबसे चिंताजनक रही, जहां AQI 370 के पार पहुंच गया। अक्षरधाम में 369, वजीरपुर में 328 और जहांगीरपुरी में 324 का स्तर दर्ज किया गया। कई अन्य इलाकों में भी AQI 200 से ऊपर है, जो “खराब” श्रेणी में माना जाता है।

बढ़ते प्रदूषण के पीछे कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड बढ़ने के साथ हवा की रफ्तार में कमी, पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं और वाहनों से निकलने वाला धुआं—इन सभी कारणों ने मिलकर दिल्ली-एनसीआर की हवा को और ज्यादा दूषित कर दिया है। इसके अलावा, निर्माण कार्यों की धूल और त्योहारों के दौरान होने वाली आतिशबाजी वायु गुणवत्ता को और बिगाड़ सकती है।

सरकार का विंटर एक्शन प्लान लागू

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 2025-26 के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू कर दिया है। इस योजना में 7 प्रमुख थीम और 25 एक्शन पॉइंट्स शामिल हैं। इसके तहत पराली प्रबंधन, सड़कों से धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी, खुले में कूड़ा जलाने पर रोक, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल जैसे उपाय किए जाएंगे।

नागरिकों से सहयोग की अपील

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाएं — अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचें, खुले में कचरा न जलाएं और प्रदूषण से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी ‘ग्रीन दिल्ली ऐप’ पर दर्ज कराएं।

दिल्ली की हवा में घुलता ज़हर एक बार फिर चेतावनी दे रहा है — यदि अब सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले हफ्तों में सांस लेना और मुश्किल हो सकता है।

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