अम्बिकापुर/सूरजपुर | सरगुजा संभाग के स्वास्थ्य सेवाओं के संयुक्त संचालक (JD) डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने सूरजपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सामने आई गंभीर शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) सूरजपुर को पत्र जारी कर दो अलग-अलग मामलों में तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मामला 1: इलाज के नाम पर मासूम की मौत और निजी अस्पतालों का खेल
दैनिक समाचार पत्र में “गरीबी की लाचारी, सिस्टम की खामोशी: इलाज के नाम पर भटकाई गई मासूम की जिंदगी बुझी” शीर्षक से प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए डॉ. शुक्ला ने गहरा क्षोभ व्यक्त किया है। खबर में बताया गया था कि कैसे दूरस्थ क्षेत्रों के गरीब और अशिक्षित लोग जब सरकारी अस्पताल पहुँचते हैं, तो उन्हें राहत देने के बजाय सुविधाओं का अभाव बताकर निजी अस्पतालों की ओर मोड़ दिया जाता है। इसी भटकाव के कारण एक मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ी।
जेडी ने सीएमएचओ को अपने स्तर पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित करने और पूरे मामले की बिंदुवार जांच कर 03 कार्यदिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
मामला 2: महुली उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला, 20 हजार ग्रामीण बेहाल
दूसरे मामले में, ग्राम पंचायत महुली (वनांचल क्षेत्र) के उप स्वास्थ्य केंद्र के लंबे समय से बंद रहने और ताला लटके होने की शिकायत पर भी कार्रवाई की गई है। समाचार में “महुली उप स्वास्थ्य केन्द्र पर लटका ताला, मरीज बेहाल” शीर्षक से बताया गया था कि केंद्र बंद होने से क्षेत्र के लगभग 15 से 20 हजार ग्रामीण बुनियादी इलाज के लिए भटक रहे हैं।
निर्देश: इस संबंध में डॉ. शुक्ला ने सीएमएचओ सूरजपुर को निर्देशित किया है कि वे तत्काल वस्तुस्थिति की जांच करें और आवश्यक सुधार कार्य सुनिश्चित करते हुए कार्यालय को अवगत कराएं।
“स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही से इलाज में बाधा आती है, तो उन पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
— डॉ. अनिल कुमार शुक्ला, संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, सरगुजा संभाग