राहुल गांधी को कंगना की राजनीतिक सलाह—बीजेपी जॉइन कर अटल जी जैसा नेतृत्व कर सकते हैं आप

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया है कि वर्तमान शासन विदेशी प्रतिनिधियों को विपक्ष के नेता से मिलने की अनुमति नहीं देता। उनका कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय में ऐसी मुलाकातें सामान्य परंपरा का हिस्सा थीं। राहुल गांधी के इसी बयान पर बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने पलटवार किया है। कंगना ने राहुल गांधी की नीयत पर सवाल उठाते हुए यहां तक कह दिया कि अगर वह सच में अटल जी जैसा बनना चाहते हैं तो बीजेपी में शामिल हो जाना चाहिए।

कंगना रनौत ने एएनआई से बातचीत में कहा,
“सरकार के अपने निर्णय होते हैं। अटल जी पूरे राष्ट्र का अभिमान थे, एक राष्ट्रीय धरोहर। लेकिन राहुल गांधी के देशहित को लेकर इरादे अक्सर संदेह पैदा करते हैं। कई अंतरराष्ट्रीय गतिविधियाँ—चाहे हिंसा भड़काने की कोशिशें हों या देश को बांटने की साजिश—इन सबके बीच उनकी भूमिका पर सवाल उठते हैं। अगर वह खुद की तुलना अटल जी से कर रहे हैं तो मेरी सलाह है कि वे बीजेपी में जाएं। भगवान ने उन्हें क्षमता दी है, वे भी अटल जी जैसे बन सकते हैं, बस सही रास्ता चुनें।”

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विदेश से आने वाले गणमान्य मेहमानों से विपक्ष का नेता भी मिला करता था, लेकिन अब मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं करते।
राहुल के अनुसार—

  • पहले विदेशी प्रतिनिधि विपक्ष के नेता से मुलाकात अवश्य करते थे।
  • यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता था।
  • लेकिन अब सरकार उनसे मिलने नहीं देती।
  • विदेशी दौरों पर भी उनके लिए ‘कौन–कौन से लोगों से नहीं मिलना है’—यह सूची थमा दी जाती है।
  • उन्होंने कहा कि विपक्ष भी भारत का प्रतिनिधित्व करता है और अलग नजरिया रखता है, इसलिए मुलाकात से रोकना उचित नहीं है।

पुतिन की यात्रा पर भी बोले राहुल गांधी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि आमतौर पर इस तरह की मुलाकातों में विपक्ष के नेता से मिलने की प्रथा रही है, लेकिन अब इसे नजरअंदाज किया जा रहा है।

थरूर ने भी कही बात

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया और कहा कि लोकतंत्र में विदेशी मेहमानों को विपक्ष से मिलवाना एक सकारात्मक परंपरा है और इससे देश की छवि मजबूत होती है।

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