बेंगलुरु। देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कर्नाटक से सामने आए एक आधिकारिक सर्वे ने चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। राज्य की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कराए गए इस सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने ईवीएम को सुरक्षित और भरोसेमंद बताया है।
यह सर्वे कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से कराया गया था, जिसमें राज्य के 102 विधानसभा क्षेत्रों से 5,100 नागरिकों की राय ली गई। सर्वे के निष्कर्षों के अनुसार, 83 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने ईवीएम पर भरोसा जताया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने इसे सटीक नतीजे देने वाली प्रणाली माना।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कलबुर्गी में ईवीएम के प्रति सबसे ज्यादा भरोसा देखने को मिला, जहां लगभग 95 प्रतिशत लोगों ने वोटिंग मशीन के पक्ष में राय दी। मैसूर में करीब 89 प्रतिशत और बेंगलुरु में लगभग 64 प्रतिशत लोगों ने ईवीएम को विश्वसनीय बताया।
सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह रिपोर्ट उन आरोपों को कमजोर करती है, जिनमें ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि यह सर्वे कांग्रेस के अंदरूनी विरोधाभास को उजागर करता है।
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्षों से लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस अब अपने ही राज्य में सामने आए तथ्यों से असहज स्थिति में है। उन्होंने इसे कांग्रेस की राजनीति के लिए झटका बताया।
भाजपा का यह भी आरोप है कि कांग्रेस चुनाव हारने की स्थिति में संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है, जबकि जीत मिलने पर उसी व्यवस्था को स्वीकार कर लेती है। पार्टी ने इसे अवसरवादी राजनीति करार दिया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का तर्क है कि मतदाताओं का ईवीएम पर भरोसा कम हो रहा है। हालांकि, भाजपा ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकारी सर्वे खुद जनता का मजबूत विश्वास दिखा रहा है, तो बैलेट की ओर लौटने का औचित्य क्या है।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी समय-समय पर ईवीएम की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को लेकर तीखे बयान दिए थे। अब कर्नाटक सरकार के इसी सर्वे ने ईवीएम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।