सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव ने असंगठित ज्वैलर्स के कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। मुंबई और देश के अन्य बड़े बाजारों में स्थानीय जौहरी और सुनार कह रहे हैं कि लगातार बढ़ती कीमतों और उनकी अस्थिरता के कारण बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
बिक्री में गिरावट की वजह
ज्वैलर्स का कहना है कि कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी हैं, जिसकी वजह से आम ग्राहक अब खरीदारी करने में हिचक रहे हैं। कई बार सोने की कीमत दस ग्राम के लिए 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है और कुछ ही समय में घटकर 1.5 लाख रुपये हो जाती है। चांदी के दाम भी हाल ही में 3 लाख रुपये प्रति किलो से घटकर 2 लाख रुपये पर आ गए। इतनी तेजी और उतार-चढ़ाव छोटे ज्वैलर्स के लिए झेलना मुश्किल हो गया है।
मुंबई के बेलवेकर ज्वैलर्स के राकेश बेलवेकर बताते हैं कि मध्यवर्गीय ग्राहक अब खरीदारी से दूरी बना रहे हैं। पुराने ग्राहकों के बजट में सोना-चांदी अब पूरी तरह से बाहर हो गए हैं। इसकी वजह से उनका स्टॉक बिना बिके पड़ा है और नकदी की समस्या बढ़ गई है।
चांदी की कीमतों का असर
पहले ग्राहक सोने के महंगे होने पर चांदी खरीदते थे, जो उनकी बजट में आती थी। लेकिन हाल के वर्षों में चांदी की कीमतों में भी तेजी आई है, जिससे यह विकल्प भी महंगा हो गया है। मुंबई के झवेरी बाजार के मुकेश जैन कहते हैं कि इस कारण ग्राहक खरीदारी बंद कर चुके हैं और कारोबार लगभग ठप हो गया है।
असंगठित ज्वैलर्स की चुनौतियां
ज्वैलर्स बताते हैं कि लगातार कीमतों में उतार-चढ़ाव और सीमित नकदी के कारण नई डिजाइन या वैरिएशन लाना मुश्किल हो गया है। पुराना स्टॉक और उच्च कीमतों की अस्थिरता छोटे ज्वैलर्स के लिए जोखिम पैदा कर रही है।
बड़े ब्रांडेड ज्वैलर्स को फायदा
दूसरी ओर, बड़े ब्रांडेड ज्वैलर्स को इस अस्थिरता का फायदा मिल रहा है। उनके पास हल्के और भारी दोनों प्रकार के आभूषण ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं, साथ ही कस्टमाइज्ड डिजाइन की सुविधा भी है। शादी-ब्याह के सीज़न में ग्राहक छोटे ज्वैलर्स के बजाय बड़े ब्रांड की ओर रुख कर रहे हैं।