Mahashivratri 2026 : रविवार, 14 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह केवल भगवान शिव की उपासना का दिन नहीं है, बल्कि शिव परिवार की एक साथ पूजा और साधना का अवसर भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग में पूरा शिव परिवार विराजमान होता है, और इस दिन की गई पूजा सभी परिवार के सदस्यों के लिए फलदायी मानी जाती है।
शिवलिंग में विराजमान शिव परिवार
शिवलिंग का ऊपरी बेलनाकार भाग भगवान शिव का प्रतीक है। चारों ओर बहती जलधारा माता पार्वती का प्रतिनिधित्व करती है। जलधारा के दाईं ओर भगवान गणेश और बाईं ओर भगवान कार्तिकेय विराजमान माने जाते हैं। बीच की धारा पर माता अशोकसुंदरी का वास होता है। शिवलिंग की ऊपरी जटाओं से गिरती जलधारा गंगा का प्रतीक मानी जाती है, और मस्तक पर चंद्रमा विराजमान होता है।
शिवलिंग के अन्य प्रमुख प्रतीक
शिवलिंग पर नाग गणों में वासुकि, वाहन नंदी और माता पार्वती अपने वाहन सिंह के साथ उपस्थित रहते हैं। इसके तीन मुख्य भाग हैं—निचला भाग ब्रह्मा का प्रतीक, मध्य भाग भगवान विष्णु का और ऊपरी बेलनाकार भाग शिव का प्रतीक है।
पूजा का महत्व
महाशिवरात्रि पर भक्त जब जल, दूध या बेलपत्र अर्पित करते हैं, तो यह केवल भगवान शिव के लिए नहीं बल्कि पूरे शिव परिवार के लिए होता है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। यही कारण है कि यह दिन हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी माना जाता है।