नई दिल्ली। जापान में मंगलवार को होक्काइडो के दक्षिण और आओमोरी के पूर्वी तट पर 7.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे कई जगहों पर हल्की-फुल्की क्षति हुई और 34 लोग मामूली रूप से घायल हुए। कुछ सड़कें और इमारतें भी प्रभावित हुईं, लेकिन बड़े पैमाने पर तबाही टल गई।
हालांकि, जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने इस झटके के बाद असामान्य चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि आने वाले सप्ताह में 8 या उससे अधिक तीव्रता वाला महाभूकंप आ सकता है। यह चेतावनी किसी भविष्यवाणी पर आधारित नहीं है, बल्कि हाल की भूकंपीय गतिविधियों के आधार पर खतरे का स्तर बढ़ा हुआ माना जा रहा है।
उत्तर जापान में खतरे का कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार का 7.5 तीव्रता वाला झटका उसी क्षेत्र में आया है जहां प्रशांत प्लेट जापान के नीचे खिसकती है। यह इलाका—जापान ट्रेंच और चिशिमा ट्रेंच के पास—देश के कई बड़े भूकंपों का केंद्र रहा है।
2011 में आई विनाशकारी सुनामी और फुकुशिमा परमाणु हादसा भी इसी क्षेत्र की हलचल के कारण हुआ था। JMA ने याद दिलाया कि 2011 के 9.0 तीव्रता वाले महाभूकंप से ठीक दो दिन पहले 7.3 तीव्रता का झटका आया था, जो अब की गतिविधियों से मिलता-जुलता है
संभावित महाभूकंप के प्रभाव
- सरकारी अनुमानों के अनुसार, यदि यहां महाभूकंप आता है, तो इसके प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:
- 30 मीटर तक ऊँची सुनामी उठ सकती है
- लगभग 1,99,000 लोगों की जान जा सकती है
- 2,20,000 से अधिक इमारतें नष्ट हो सकती हैं
- आर्थिक नुकसान लगभग 31 ट्रिलियन येन (198 बिलियन डॉलर) हो सकता है
- सर्दियों में ऐसी आपदा में 42,000 लोग हाइपोथर्मिया का शिकार हो सकते हैं
कौन से इलाके हैं अलर्ट पर
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने चेतावनी होक्काइडो से लेकर चिबा प्रांत तक के 182 नगर पालिकाओं के लिए जारी की है। यह चेतावनी पिछले वर्षों में क्षेत्रीय स्तर पर जारी किए गए सबसे स्पष्ट और व्यापक परामर्श में से एक मानी जा रही है।
- अधिकारियों की सलाह
- आपातकालीन किट तैयार रखें
- समुद्री तटीय इलाकों में सतर्क रहें
आवश्यकता पड़ने पर तत्काल निकासी के निर्देशों का पालन करें
JMA का कहना है कि इस चेतावनी का उद्देश्य लोगों को डराने का नहीं बल्कि तैयार करने का है, ताकि वे सबसे बुरे हालात के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार रहें।