नई दिल्ली : दिल्ली में नगर स्तर पर विकास कार्यों को तेज़ी से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब दिल्ली नगर निगम के आयुक्त को कहीं अधिक वित्तीय स्वायत्तता दी गई है, जिससे विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हो सकेगी।
नए प्रावधानों के अनुसार, एमसीडी आयुक्त अब सीधे 50 करोड़ रुपये तक की लागत वाले कार्यों को स्वीकृति दे सकेंगे। पहले यह सीमा बेहद सीमित थी, जिसके चलते बड़ी योजनाओं को कई समितियों और निगम सदन से गुजरना पड़ता था। इस जटिल प्रक्रिया के कारण अनेक जरूरी परियोजनाएं महीनों तक अटकी रहती थीं।
फैसलों में तेजी, फाइलों से राहत
सरकार का मानना है कि वित्तीय अधिकारों के विस्तार से न केवल फाइलों की आवाजाही कम होगी, बल्कि निर्णय लेने की रफ्तार भी बढ़ेगी। इससे सड़क मरम्मत, जलनिकासी, सफाई व्यवस्था, सामुदायिक ढांचे और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्य तय समय में पूरे किए जा सकेंगे।
स्थानीय निकायों को मजबूत करने की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि शहर के समग्र विकास के लिए नगर निगम जैसे स्थानीय निकायों को सक्षम बनाना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, यह फैसला जनहित को केंद्र में रखकर लिया गया है, ताकि योजनाओं का लाभ बिना देरी के जनता तक पहुंचे।
लंबित परियोजनाओं को मिलेगा समाधान
इस बदलाव के बाद लंबे समय से अटकी परियोजनाओं के जल्द शुरू होने की उम्मीद है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल कामकाज की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल भी संभव होगा। समय पर परियोजनाएं पूरी होने से सार्वजनिक धन की प्रभावशीलता बढ़ेगी और नागरिकों को रोजमर्रा की समस्याओं से राहत मिलेगी।