मार्च 2026 से पहले खत्म होगा नक्सलवाद? सरेंडर की तैयारी में माओवादी, सरकार से मांगी मोहलत

रायपुर/भोपाल/मुंबई। नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार जारी सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई का बड़ा असर दिखाई देने लगा है। दबाव के चलते जहां बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, वहीं संगठन के शीर्ष नेता हिडमा के हाल ही में आंध्र प्रदेश में मारे जाने के बाद माओवादी कैंप में असहजता और भय का माहौल है। इसी बीच प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) स्पेशल जोनल कमेटी ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है।

माओवादी संगठन ने सरेंडर की पेशकश की

प्राप्त जानकारी के अनुसार, माओवादी संगठन ने अपने लेटर में 15 फरवरी, 2026 तक हथियार छोड़ने और सरकार की रिहैबिलिटेशन पॉलिसी स्वीकार करने की इच्छा जताई है। इसके साथ ही उन्होंने तीनों राज्यों की सरकारों से अपील की है कि निर्धारित तारीख तक एंटी-माओवादी ऑपरेशन रोक दिए जाएं, ताकि संगठन लोकतांत्रिक केंद्रवाद की प्रक्रिया के तहत सामूहिक निर्णय ले सके।

लेटर में तीन राज्यों के सीएम से क्या कहा गया?

यह पत्र महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस, छत्तीसगढ़ के CM विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा और मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव को संबोधित है।
MMC ज़ोन के प्रवक्ता अनंत के नाम से जारी पत्र में लिखा गया है—

“हम MMC स्पेशल जोनल कमेटी भी हथियार छोड़ने और सरकार की पुनर्वास योजना को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। हमारी पार्टी डेमोक्रेटिक सेंट्रलिज्म पर आधारित है, इसलिए हम सामूहिक रूप से निर्णय लेने के लिए कुछ समय की मांग करते हैं।”

माओवादियों ने यह भी कहा है कि वे निर्धारित समय तक अपनी गतिविधियां रोक देंगे और सरकार ने जो माओवाद समाप्त करने की 31 मार्च, 2026 की डेडलाइन तय की है, उसी समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करेंगे।

छत्तीसगढ़ सरकार ने जताई आपत्ति, मांगा ठोस प्रस्ताव

पत्र सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए माओवादियों की समयसीमा व प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा—

“मैंने लेटर और ऑडियो दोनों देखे-सुने हैं। वे 15 फरवरी की बात कर रहे हैं, जबकि इतने लंबे समय की जरूरत नहीं है। किसी के पास इतना समय नहीं है। उन्हें एक ठोस और स्पष्ट प्रपोजल देना चाहिए।”

सरकार का रुख साफ—हथियार छोड़ो या कार्रवाई का सामना करो

केंद्र और राज्य सरकारें पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि नक्सलियों के पास सिर्फ दो विकल्प हैं—
या तो आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें, अन्यथा कड़े अभियान का सामना करें।

सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे लगातार ऑपरेशनों ने नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया है, और अब संगठन की शीर्ष कमेटी के इस पत्र ने आने वाले दिनों में माओवादी गतिविधियों पर बड़ा असर डालने के संकेत दिए हैं।

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