बीजापुर। कभी नक्सल गतिविधियों के गढ़ के रूप में पहचान रखने वाला बीजापुर का नेशनल पार्क इलाका अब विकास की नई पहचान बनने की ओर अग्रसर है। गुरुवार को जिले के सुदूरवर्ती गांव उल्लूर और चिल्लामरका में सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैम्प की स्थापना की गई।
यह पहल छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “नियद नेल्लानार” के तहत की गई है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस और प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए कैम्प स्थापित किए।
सुरक्षा अभियान में बड़ी उपलब्धि
साल 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 36 सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा चुके हैं। इसी दौरान 496 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण, 193 मारे गए और 900 को गिरफ्तार किया गया। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि अभियान ने रणनीतिक सफलता हासिल की है और नक्सली नेटवर्क कमजोर हुआ है।
ग्रामीणों में उत्साह और विश्वास
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि इन सुरक्षा कैम्पों से उनके जीवन में स्थायित्व, शांति और समृद्धि की उम्मीद जगी है। पिछले दो वर्षों में जिले में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। अब नेशनल पार्क क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने जा रहा है।
ग्रामीणों का मानना है कि कैम्पों की स्थापना से न केवल सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि विकास योजनाओं का लाभ भी सीधे गांव-गांव तक पहुंच सकेगा।