नई CPI सीरीज से महंगाई पर काबू के संकेत, 4% लक्ष्य से नीचे रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की संशोधित श्रृंखला लागू होने के बाद भी खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत (±2%) लक्ष्य दायरे में रहने का अनुमान है। बैंक ऑफ बड़ौदा की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि नई श्रृंखला देश में बदलते उपभोग पैटर्न को अधिक सटीक तरीके से दर्शाती है और नीति-निर्माण को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में सहायक होगी।

कोर महंगाई पर फोकस जरूरी

रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुख्य महंगाई (कोर इंफ्लेशन) पर कड़ी निगरानी आवश्यक है। सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव समग्र सूचकांक को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, नई सीरीज में वस्तुओं का वेटेज संतुलित रखने से महंगाई के लक्ष्य सीमा में रहने की संभावना मजबूत हुई है।

खाद्य महंगाई की नई तस्वीर

नई श्रृंखला में खाद्य पदार्थों के भार को कम किया गया है, जिससे मौसमी उतार-चढ़ाव का असर पहले की तुलना में अलग तरीके से दिख रहा है। जहां पुरानी सीरीज में पिछले महीनों में खाद्य महंगाई में गिरावट दर्ज हो रही थी, वहीं संशोधित आंकड़ों में हल्की तेजी परिलक्षित हुई है। इसका एक कारण अत्यधिक अस्थिर सब्जी समूह—टमाटर, प्याज और आलू—के वेटेज में बदलाव बताया गया है।

वस्तुओं और बाजारों का दायरा बढ़ा

संशोधित CPI टोकरी में वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है। अब 1,465 ग्रामीण और 1,395 शहरी बाजारों के साथ 12 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी कीमतों का संकलन किया जा रहा है। यह कदम डिजिटल अर्थव्यवस्था और बदलती उपभोक्ता आदतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

नई टोकरी में ग्रामीण आवास, ऑनलाइन मीडिया एवं स्ट्रीमिंग सेवाएं, वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद, जौ, पेनड्राइव और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क जैसी वस्तुएं जोड़ी गई हैं। वहीं रेडियो, टेप रिकॉर्डर और डीवीडी प्लेयर जैसी कम प्रासंगिक वस्तुओं को हटाया गया है।

जरूरी वस्तुओं के दाम में नरमी

रिपोर्ट में बताया गया है कि फरवरी 2026 के शुरुआती दिनों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में सालाना आधार पर मामूली गिरावट दर्ज की गई। कुछ खाद्य तेलों और दालों को छोड़कर अधिकांश खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रण में हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई CPI श्रृंखला से महंगाई का आकलन अधिक आधुनिक और यथार्थपरक होगा, जो ब्याज दरों और अन्य मौद्रिक नीतिगत निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करेगा।

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