चंडीगढ़: भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सीमा पर लगी फेंसिंग को लगभग 200 मीटर तक स्थानांतरित करने की योजना के तहत पंजाब के छह सरहदी जिलों में जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस निर्णय से सीमा सुरक्षा के साथ-साथ इलाके के विकास कार्यों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव किया है। अब इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को सौंप दी गई है। एसडीएम को कलेक्टर के समान अधिकार दिए गए हैं, जिससे मुआवजा तय करने, पुनर्वास और अन्य जरूरी फैसले जिला स्तर पर ही लिए जा सकेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि पहले भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में लंबी सरकारी प्रक्रिया के कारण किसानों को मुआवजा मिलने में काफी समय लग जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद फैसले तेजी से होंगे और प्रभावित किसानों को समय पर भुगतान तथा पुनर्वास की सुविधा मिल सकेगी।
सरहदी क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए यह फैसला राहतभरा माना जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि स्थानीय स्तर पर अधिकार मिलने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी।
फिलहाल संबंधित जिलों में सर्वेक्षण और अन्य तैयारियां शुरू की जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जल्द ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी जाएगी।