संविधान दिवस के अवसर पर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन एवं स्वदेशी मध्यस्थता विषय पर संगोष्ठी

दुर्ग : संविधान दिवस के अवसर पर, 26 नवम्बर 2025 को मध्यस्थता केन्द्र, जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मध्यस्थता प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व में मध्यस्थ अधिवक्ताओं, जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग के अधिवक्तागण, पक्षकारों एवं कर्मचारियों ने एकजुट होकर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में मध्यस्थता प्रभारी अधिकारी ने संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की अहमियत को रेखांकित करते हुए, संविधान के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए स्वदेशी मध्यस्थता प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से मध्यस्थता की प्रथा प्रचलित रही है, और वर्तमान समय में विवादों के त्वरित निपटारे के लिए स्वदेशी मध्यस्थता प्रणाली सबसे प्रभावी समाधान साबित हो सकती है। उन्होंने इसके माध्यम से विवादों को कम खर्च में और शीघ्र निपटाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ मध्यस्थ अशोक जायसवाल ने अपने प्रेरक वक्तव्य में भारतीय प्राचीन इतिहास में मध्यस्थता (Mediation) की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में विवादों के शांतिपूर्ण निपटान की परंपरा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल में ग्राम पंचायत, कुल परिषद, श्रेणी संगठनों तथा जनपद सभाओं के माध्यम से विवादों का समाधान संवाद, आपसी सहमति एवं परस्पर सम्मान के आधार पर किया जाता था। मध्यस्थता केवल एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और भारतीय समाज की उदात्त परंपरा का सशक्त अंग है। आज इसे पुनः अपनाना न केवल न्यायिक भार को कम करेगा, बल्कि समाज में सौहार्द और सहयोग की भावना को भी मजबूत करेगा।

इसके अतिरिक्त, ढाल सिंह देवागंन, अधिवक्ता मध्यस्थ ने भी मध्यस्थता को विवादों के समाधान का एक आसान और प्रभावी तरीका बताया, जिससे दो पक्षों के बीच सुलह-सफाई कर समस्याओं का शीघ्र समाधान हो सकता है।  कविता गिरी गोस्वामी, अधिवक्ता मध्यस्थ ने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी विवादों का समाधान नहीं करती, बल्कि यह दो पक्षों के बीच आपसी रिश्तों को सुधारने और प्रेम व सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करने का भी एक जरिया है।

कार्यक्रम का समापन मध्यस्थता के महत्व को समझाते हुए स्वदेशी मध्यस्थता प्रणाली को बढ़ावा देने के साथ किया गया।

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