भारत की कार्रवाई से प्रभावित बलूच नेता, जयशंकर को पत्र लिखकर ऑपरेशन सिंदूर की खुलकर तारीफ

इस्लामाबाद : पाकिस्तान और चीन की बढ़ती नजदीकियों को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल तेज हो गई है। प्रसिद्ध बलूच नेता और मानवाधिकारों की आवाज माने जाने वाले मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक विस्तृत पत्र भेजकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि आने वाले महीनों में चीन, पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में सीधे अपनी सेना तैनात कर सकता है।

बलूचिस्तान पर ‘ड्रैगन शैडो’

पत्र में मीर यार बलूच ने कहा है कि बीजिंग–इस्लामाबाद की रणनीतिक साझेदारी अब केवल आर्थिक नहीं रही, बल्कि सैन्य हस्तक्षेप की दिशा में बढ़ रही है। उनका दावा है कि चीन, अपने कथित निवेश और परियोजनाओं की सुरक्षा के नाम पर बलूचिस्तान में PLA (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) की तैनाती की योजना बना रहा है।
उन्होंने चेताया कि पहले से ही दमन, जबरन गुमशुदगी और मानवाधिकार उल्लंघन झेल रहे बलूच नागरिकों के लिए यह स्थिति और भयावह हो सकती है।

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की खुलकर सराहना

अपने नए साल 2026 के संदेश में मीर बलूच ने भारत के नेतृत्व और सुरक्षा नीति की प्रशंसा की। उन्होंने वर्ष 2025 में भारतीय सेना द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कार्रवाई बताया।
उन्होंने लिखा कि पहलगाम हमले के बाद भारत की त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया ने न सिर्फ आतंकी ढांचे को कमजोर किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में यह संदेश दिया कि आतंक के खिलाफ अब कोई समझौता नहीं होगा।

बलूचिस्तान की कूटनीतिक पहल

मीर बलूच ने यह भी जानकारी दी कि बलूच राष्ट्रवादी समूहों द्वारा मई 2025 में की गई प्रतीकात्मक स्वतंत्रता घोषणा के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने की तैयारी है।
उन्होंने ऐलान किया कि 2026 के पहले सप्ताह में ‘बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमेटिक वीक’ का आयोजन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद और समर्थन हासिल करना है।

हिंगलाज माता और भारत से ऐतिहासिक जुड़ाव

भारत–बलूचिस्तान के सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए मीर बलूच ने हिंगलाज माता मंदिर को साझा सभ्यता और आस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने बलूचिस्तान के लगभग 6 करोड़ लोगों की ओर से भारत के नागरिकों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि दोनों क्षेत्रों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय रिश्ते भविष्य में और मजबूत होंगे।

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