नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की कंपनियों पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और पतंजलि फूड्स लिमिटेड को डाबर इंडिया के साथ चल रहे च्यवनप्राश विज्ञापन विवाद में कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि यदि कंपनी अपनी अपील वापस नहीं लेती है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
दिसंबर 2024 में डाबर इंडिया ने पतंजलि के विज्ञापनों को भ्रामक और मानहानिकारक बताते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। डाबर का आरोप था कि पतंजलि अपने विज्ञापनों में प्रतिद्वंद्वी ब्रांडों के उत्पादों को असुरक्षित और बच्चों के लिए हानिकारक बता रही है, यहां तक कि उनमें पारे की मौजूदगी का दावा भी किया गया। साथ ही, पतंजलि ने अपने च्यवनप्राश में 51 जड़ी-बूटियों का उपयोग बताकर डाबर के 40 जड़ी-बूटी वाले उत्पाद को कमतर दिखाया।
अदालत का रुख
3 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पतंजलि को आदेश दिया था कि वह अपने प्रिंट और टीवी विज्ञापनों से आपत्तिजनक पंक्तियां हटाए। हालांकि, विज्ञापन पूरी तरह रोकने का निर्देश नहीं था। अदालत ने स्पष्ट किया कि पतंजलि अपने उत्पाद का प्रचार कर सकती है, बशर्ते प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की छवि खराब करने वाले अंश शामिल न हों।
लेकिन पतंजलि ने इस आदेश को वाणिज्यिक अपीलीय खंडपीठ में चुनौती दी। कंपनी ने तर्क दिया कि उसके विज्ञापन वैध आत्म-प्रचार और वाणिज्यिक अभिव्यक्ति का हिस्सा हैं।
हाईकोर्ट की चेतावनी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर और ओ.पी. शुक्ला की पीठ ने कहा कि जब मूल आदेश केवल आपत्तिजनक पंक्तियों को हटाने तक सीमित था, तो अपील दायर करना अनावश्यक है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पतंजलि अपनी अपील पर अड़ी रही, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।