नॉर्थ बॉर्डर पर शांति बरकरार, मगर सुरक्षा बल पूरी तरह अलर्ट: थल सेनाध्यक्ष

नई दिल्ली। भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा है कि सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की सैन्य प्रतिक्रिया अब पूरी तरह स्पष्ट, संतुलित और निर्णायक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने यह संदेश दे दिया है कि किसी भी प्रकार की आतंकी या सैन्य चुनौती का जवाब सटीक रणनीति और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ दिया जाएगा। यह ऑपरेशन अभी भी जारी है और सेना पूरी तरह सतर्क है।

सेनाध्यक्ष ने जानकारी दी कि उत्तरी सीमा पर हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं, लेकिन वहां लगातार निगरानी और चौकसी बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि उच्च स्तर की बातचीत, संपर्क तंत्र की बहाली और विश्वास निर्माण उपायों के चलते सीमा पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, हालांकि किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही।

ऑपरेशन सिंदूर ने बदली रणनीतिक तस्वीर

जनरल द्विवेदी ने बताया कि 7 मई 2025 को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत मात्र कुछ ही मिनटों में सटीक सैन्य कार्रवाई की गई, जिसके बाद कई घंटों तक समन्वित अभियान चला। इस दौरान आतंकवादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया और उनके नेटवर्क को प्रभावी रूप से निष्क्रिय किया गया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने न केवल आतंकी ढांचों को तोड़ा, बल्कि लंबे समय से दी जा रही परमाणु धमकियों की बयानबाजी को भी अप्रासंगिक बना दिया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में अब भी कुछ आतंकी कैंप सक्रिय हैं, जिन पर भारतीय सेना की कड़ी नजर बनी हुई है। किसी भी उकसावे या गतिविधि की स्थिति में सेना आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बांग्लादेश को लेकर संवाद जारी

बांग्लादेश से जुड़े सवालों पर थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि भारत ने किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए कई स्तरों पर संवाद के रास्ते खुले रखे हैं। सेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है और सैन्य प्रतिनिधिमंडल भी वहां दौरा कर चुका है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है।

वैश्विक हालात और भारत की तैयारी

सेनाध्यक्ष ने कहा कि बीते एक वर्ष में दुनिया भर में सशस्त्र संघर्षों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसे समय में केवल वही देश सुरक्षित रह पाते हैं, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रहते हैं। भारत में आने वाले समय के युद्ध संयुक्त सैन्य प्रयास, तकनीक और राष्ट्रीय समन्वय के माध्यम से लड़े जाएंगे।

उन्होंने प्रधानमंत्री के जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत ने सेना की क्षमताओं को मजबूत किया है। पिछले एक साल में कई अहम संगठनात्मक सुधारों को मंजूरी दी गई है, जिनमें नई एविएशन ब्रिगेड जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल है।

सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

जनरल द्विवेदी ने बताया कि सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार विस्तार पा रही है। मेडिकल और एजुकेशन कोर में उनकी भागीदारी के साथ-साथ महिला स्काइडाइविंग टीम का गठन इसका उदाहरण है। इस टीम की सदस्य अब तक सैकड़ों सफल जंप पूरी कर चुकी हैं, जो भारतीय सेना में महिलाओं की क्षमता, साहस और पेशेवर दक्षता को दर्शाता है।

उन्होंने अंत में कहा कि भारतीय सेना देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में किसी भी दुस्साहस का कड़ा और प्रभावी जवाब दिया जाएगा।

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