दुर्ग/भिलाई। सिख धर्म और परंपराओं से दूर होकर अन्य धर्म अपना चुके सिख समाज के लोगों ने आज पूरे विधि-विधान के साथ अपने मूल धर्म में ‘घर वापसी’ की। छत्तीसगढ़ सिख पंचायत के बैनर तले सुपेला गुरुद्वारे में आयोजित एक गरिमामय सभा में इन परिवारों ने पुनः सिख मर्यादाओं को स्वीकार किया।
सुपेला गुरुद्वारे में सजी श्रद्धा की सभा
इस विशेष ‘घर वापसी’ कार्यक्रम का आयोजन सुपेला स्थित गुरुद्वारे में किया गया। कार्यक्रम में उन लोगों को आमंत्रित किया गया था जो किन्हीं कारणों से सिख पंथ से अलग होकर दूसरे धर्मों की ओर चले गए थे। समाज के वरिष्ठों और जत्थेदारों की मौजूदगी में इन सभी ने अरदास की और गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर पुनः सिख धर्म की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया।

सिख यूथ सेवा समिति की अहम भूमिका
इस पूरे अभियान का नेतृत्व सर्व समाज कल्याण समिति एवं सिख यूथ सेवा समिति के अध्यक्ष इंदरजीत सिंह ने किया। इंदरजीत सिंह ने सभी सदस्यों को सिख धर्म की शिक्षाओं और बलिदानों से अवगत कराते हुए उनकी वापसी सुनिश्चित कराई। उन्होंने कहा कि “सिख धर्म सेवा और वीरता का प्रतीक है, अपने मूल से जुड़ना ही सबसे बड़ा गौरव है।”

समाज में हर्ष की लहर
छत्तीसगढ़ सिख पंचायत ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसे और भी प्रयास किए जाएंगे ताकि भटके हुए लोगों को वापस अपनी जड़ों से जोड़ा जा सके। कार्यक्रम के समापन पर ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह’ के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।