नरवणे की किताब पर सियासी घमासान, पेंगुइन पब्लिकेशन की सफाई—‘कोई भी कॉपी नहीं छपी’

नई दिल्ली : पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा को लेकर सियासी हलकों से लेकर कानूनी गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। अभी तक प्रकाशित न हुई इस किताब को लेकर संसद में उठे सवालों के बाद अब पब्लिशिंग कंपनी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से औपचारिक स्पष्टीकरण सामने आया है।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने साफ शब्दों में कहा है कि जनरल नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन के सभी विशेष अधिकार केवल उसी के पास हैं और यह किताब अभी तक बाजार में नहीं आई है। कंपनी के अनुसार, न तो किताब की कोई छपी हुई प्रति जारी की गई है और न ही कोई डिजिटल वर्जन सार्वजनिक किया गया है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली पुलिस ने किताब की मैन्युस्क्रिप्ट के कथित अवैध प्रसार को लेकर मामला दर्ज किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डिजिटल और अन्य माध्यमों से सामग्री के गैरकानूनी सर्कुलेशन की शिकायत पर स्पेशल सेल ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पब्लिशर ने अपने बयान में दोहराया कि अब तक न तो पुस्तक का प्रिंट संस्करण प्रकाशित किया गया है और न ही ई-बुक या पीडीएफ फॉर्मेट में किसी तरह का वितरण किया गया है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि यदि किताब का कोई भी हिस्सा या पूरा संस्करण किसी भी माध्यम से प्रसारित किया जा रहा है, तो वह सीधे तौर पर कॉपीराइट कानून का उल्लंघन होगा।

गौर करने वाली बात यह है कि बीते सप्ताह कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद में इस किताब की कथित प्रति दिखाते हुए देखा गया था। वह लोकसभा में 2 फरवरी से पुस्तक के कुछ अंशों का हवाला देना चाहते थे, लेकिन सदन में यह कहते हुए आपत्ति जताई गई कि संबंधित किताब अब तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित ही नहीं हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित न रहकर कानूनी जांच के दायरे में भी आ गया है, जिससे आने वाले दिनों में विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

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