भारत के शासन तंत्र से जुड़ी एक अहम पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सईद बिजनेस स्कूल ने दिसंबर 2024 में प्रकाशित अपनी एक केस स्टडी में PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) प्लेटफॉर्म को प्रभावी, नवोन्मेषी और परिणामोन्मुख प्रशासनिक व्यवस्था बताया है। अध्ययन में कहा गया है कि इस मंच ने न केवल वर्षों से रुकी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति दी, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को भी मजबूत किया।
ठहराव से प्रगति की ओर
“From Gridlock to Growth: How Leadership Enables India’s PRAGATI Ecosystem to Power Progress” शीर्षक वाली इस केस स्टडी को गेट्स फाउंडेशन का समर्थन प्राप्त है। रिपोर्ट के अनुसार, PRAGATI भारत की डिजिटल गवर्नेंस व्यवस्था का एक अहम स्तंभ बनकर उभरा है, जिसने परियोजनाओं की निगरानी, समीक्षा और समयबद्ध क्रियान्वयन में निर्णायक भूमिका निभाई है।
NH-48 परियोजना बनी उदाहरण
अध्ययन में राष्ट्रीय राजमार्ग-8, जिसे अब NH-48 के नाम से जाना जाता है, के दहिसर–सूरत खंड का विस्तृत जिक्र किया गया है। 239 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। उद्देश्य था चार लेन की सड़क को छह लेन में बदलना और आसपास के इलाकों के लिए सर्विस रोड विकसित करना। इसे 2011 तक पूरा किया जाना था, लेकिन विभिन्न अड़चनों के चलते यह परियोजना वर्षों तक अधूरी पड़ी रही।
पर्यावरणीय अड़चन बनी सबसे बड़ी चुनौती
2014 तक करीब आठ किलोमीटर का हिस्सा अधूरा था, जिसमें मुंबई के पास संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से गुजरने वाला 1.5 किलोमीटर का खंड सबसे बड़ी बाधा बना। वन्यजीव संरक्षण और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों पर मंजूरी न मिलने से राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के बीच गतिरोध पैदा हो गया था।
PRAGATI समीक्षा से खुला समाधान का रास्ता
हालांकि यह मामला पहले से प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (PMG) पोर्टल पर दर्ज था, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकल पाया। ऑक्सफोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में जब इस परियोजना को PRAGATI प्लेटफॉर्म के तहत उच्चस्तरीय समीक्षा में लाया गया, तब हालात बदलने लगे।
समन्वय और संवाद से निकला समाधान
PRAGATI के जरिए सभी संबंधित पक्षों—केंद्र, राज्य और नियामक संस्थाओं—के बीच संवाद को दोबारा सक्रिय किया गया। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने अंतिम निर्णय का अधिकार महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव बोर्ड को सौंपा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड ने कुछ शर्तों के साथ परियोजना को हरी झंडी दी, जिसमें वन्यजीवों, खासकर तेंदुओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध शामिल थे।
नेतृत्व आधारित निगरानी की ताकत
ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि PRAGATI प्लेटफॉर्म नेतृत्व आधारित निगरानी और एकीकृत समीक्षा का प्रभावी उदाहरण है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली नियमित बैठकों ने न केवल प्रशासनिक अड़चनों को दूर किया, बल्कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन भी सुनिश्चित किया।
यह केस स्टडी दर्शाती है कि सही नेतृत्व, तकनीक और समन्वय के जरिए लंबे समय से अटकी परियोजनाओं को भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सकता है।