भारत पर नए टैरिफ की तैयारी? US सांसद का ट्रंप पर बड़ा आरोप

न्यूयॉर्क। भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर अमेरिका में एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी सांसद Brad Sherman ने राष्ट्रपति Donald Trump की टैरिफ नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रशासन भारत के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने के लिए कारण तलाश रहा है।

शर्मन ने कहा कि व्हाइट हाउस भारत पर सख्ती दिखाने के लिए रूस से तेल आयात के मुद्दे को आधार बना रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि हंगरी अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से खरीदता है, जबकि चीन भी रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन उन पर भारत जैसा रुख नहीं अपनाया गया। उनके मुताबिक, भारत रूस से लगभग 21 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, फिर भी उसे अलग से निशाना बनाया जा रहा है।

हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर लागू टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। इससे पहले अगस्त में भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया गया था। बाद में एक अंतरिम व्यापार समझौते के तहत कुछ दंडात्मक शुल्क हटाए गए।

व्यापारिक आंकड़े भी दोनों देशों के बीच बदलते समीकरण की ओर इशारा करते हैं। जनवरी में अमेरिका को भारत का निर्यात घटकर 6.6 अरब डॉलर रह गया, जबकि उसी अवधि में अमेरिका से आयात बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया। इससे व्यापार संतुलन पर असर पड़ा है।

इस बीच, टैरिफ नीति के प्रभाव पर आई एक नई रिपोर्ट ने भी चर्चा को तेज कर दिया है। Federal Reserve Bank of New York से जुड़े अर्थशास्त्रियों के अध्ययन में पाया गया कि आयात शुल्क का अधिकांश भार विदेशी कंपनियों के बजाय अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर पड़ा। वहीं Tax Foundation की एक रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ के कारण 2025 में हर अमेरिकी परिवार पर औसतन 1000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा, जो 2026 में और बढ़ सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के इस नए घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों और नीति विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले महीनों में दोनों देश अपनी व्यापारिक रणनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।

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