रायपुर: संसद के बजट सत्र की शुरुआत पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने माओवाद प्रभावित बस्तर क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक बदलावों को देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों को कभी भय और हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब विकास, भरोसे और सामान्य जीवन की वापसी हो रही है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बस्तर से जुड़े कुछ प्रतीकात्मक उदाहरण साझा करते हुए कहा कि वर्षों बाद जब बीजापुर के एक सुदूर गांव तक बस सेवा पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने इसे उत्सव की तरह मनाया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक बस नहीं थी, बल्कि उम्मीद और संपर्क की शुरुआत थी।
युवाओं की ऊर्जा और नई पहचान
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आज बस्तर के युवा खेल, शिक्षा और रोजगार के जरिए अपनी नई पहचान बना रहे हैं। बस्तर ओलंपिक्स में युवाओं की सक्रिय भागीदारी इसका प्रमाण है। वहीं, जो लोग कभी हिंसा के रास्ते पर थे, वे अब मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं और जगदलपुर जैसे शहरों में रोजगार पा रहे हैं।
सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीति के तहत सुरक्षा बलों ने माओवादी हिंसा के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए हैं। एक समय ऐसा था जब देश के 100 से अधिक जिले इस समस्या से प्रभावित थे और खासकर आदिवासी व वंचित वर्ग इसका सबसे बड़ा शिकार बने। माओवादी विचारधारा ने कई पीढ़ियों को अवसरों से वंचित कर दिया।
तेजी से सिमटती चुनौती
राष्ट्रपति ने बताया कि हालात में अब उल्लेखनीय सुधार आया है। माओवादी प्रभाव वाले जिलों की संख्या घटकर सिंगल डिजिट में पहुंच गई है और बीते एक वर्ष में बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा को अपनाया है। इससे प्रभावित इलाकों में शांति और भरोसे का माहौल लौटा है।
मुख्यधारा में लौटने वालों को पूरा सहयोग
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आश्वासन दिया कि हथियार छोड़ने वालों को सरकार हरसंभव सहायता दे रही है, ताकि वे सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि वह समय दूर नहीं जब देश माओवादी हिंसा से पूरी तरह मुक्त होगा और बस्तर विकास की नई कहानी लिखेगा।