वीर बाल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के 20 विशिष्ट बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन बच्चों को दिया जाता है, जिन्होंने कम उम्र में ही साहस, खेल, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक सेवा, कला और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर समाज के लिए मिसाल कायम की है।
सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन बच्चों की उपलब्धियां पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे न केवल प्रतिभाशाली हैं, बल्कि उनमें संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और देश के प्रति समर्पण भी दिखाई देता है, जो भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव है।
वीर बाल दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में वीर बाल दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2022 से हर साल 26 दिसंबर को यह दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दिन सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान की स्मृति से जुड़ा हुआ है, जो सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए दिया गया था।
उन्होंने विशेष रूप से साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह के साहस का उल्लेख किया, जिन्होंने अत्यंत कम उम्र में भी अपने धर्म और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। राष्ट्रपति ने कहा कि उनका बलिदान न केवल इतिहास का हिस्सा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
देशभक्ति और मानवीय मूल्यों पर दिया जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि जिन देशों के बच्चे उच्च आदर्शों और राष्ट्रप्रेम की भावना से प्रेरित होते हैं, वहां समाज और मानवता दोनों सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने इस अवसर पर महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह की जयंती को भी याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
बच्चों की प्रतिभा ने बढ़ाया देश का मान
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार का उद्देश्य बच्चों की असाधारण प्रतिभा को पहचान देना और अन्य बच्चों को प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सम्मानित सभी 20 बच्चों ने अलग-अलग क्षेत्रों में असाधारण कार्य कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बार की सबसे कम उम्र की पुरस्कार विजेता केवल सात वर्ष की वाका लक्ष्मी प्राज्ञिका हैं, जो यह साबित करती हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। राष्ट्रपति ने अजय राज और मोहम्मद सिदान पी जैसे बच्चों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने साहस और सूझबूझ से लोगों की जान बचाई।
भावुक क्षण और प्रेरणादायक उदाहरण
राष्ट्रपति मुर्मु ने उन बच्चों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जिन्होंने दूसरों की जान बचाने के प्रयास में अपने प्राण त्याग दिए। उन्होंने नौ वर्षीय व्योमा प्रिया और 11 वर्षीय कमलेश कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि आज उनके माता-पिता ने यह सम्मान ग्रहण किया, जो पूरे देश के लिए भावुक करने वाला क्षण है।
इसके अलावा, राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर तैनात सैनिकों तक दूध, पानी और लस्सी पहुंचाने वाले 10 वर्षीय शवण सिंह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण समाज में सेवा और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी सम्मानित बच्चे आगे भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनते रहेंगे और उनकी उपलब्धियां देश के अन्य बच्चों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।
इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर सहित कई अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।