UGC के नए नियमों का विरोध: राजपूत क्षत्रिय महासभा ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, नियम वापस लेने की मांग

दुर्ग | 29 जनवरी  : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों का विरोध अब तेज हो गया है। राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ (रहटादह) ने इन नियमों को ‘अव्यवहारिक’ और ‘एकपक्षीय’ बताते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम गुरुवार को दुर्ग कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा है। मुख्यमंत्री और कलेक्टर के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में 13 जनवरी 2026 से प्रभावी नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।

सीधी कार्रवाई पर आपत्ति

महासभा के प्रतिनिधि दीपक सिंह राजपूत, सत्येंद्र राजपूत, नरेंद्र सिंह राजपूत एवं अन्य पदाधिकारियों ने नियमों की विसंगतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नए प्रावधानों के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों और प्राध्यापकों के विरुद्ध शिकायतों पर बिना पक्ष सुने सीधे कार्रवाई संस्थित करने का भय है। महासभा के अनुसार, आरोपी पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर न देना ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।

झूठे आरोपों की आशंका

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इन प्रभावी नियमों के कारण सामान्य संवर्ग के लोगों पर झूठे आरोप-प्रत्यारोप लगाकर उन्हें फंसाए जाने की प्रबल आशंका है। राजपूत क्षत्रिय महासभा ने तर्क दिया है कि शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और समानता जरूरी है, लेकिन वह किसी एक पक्ष के हितों की अनदेखी कर नहीं होनी चाहिए।

समानता के अधिकार की मांग

महासभा ने प्रधानमंत्री से विनम्र अनुरोध किया है कि ‘समानता के अधिकार’ के तहत सवर्ण समुदाय के विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के हितों का संवर्धन सुनिश्चित किया जाए। राजपूत क्षत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ ने सामूहिक रूप से इस नए नियम को अस्वीकार करते हुए इसे वापस लेने की पुरजोर अपील की है।

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