राहुल गांधी की कोशिशें बेअसर? भूपेन बोरा के भाजपा जाने की अटकलें तेज

Guwahati: असम की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Bhupen Bora के इस्तीफे के बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह जल्द ही नई राजनीतिक दिशा चुन सकते हैं, जिससे राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव संभव है।

इस्तीफे के बाद बढ़ी सस्पेंस

हाल ही में बोरा ने Indian National Congress से अलग होने का फैसला लिया था। पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें मनाने की कोशिशें भी हुईं। सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नेताओं ने उनसे संपर्क कर पुनर्विचार का आग्रह किया, लेकिन अब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।

भाजपा की ओर से खुले संकेत

इसी बीच मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने बयान देकर राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि बोरा भाजपा में आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। सरमा ने इसे संभावित “घर वापसी” करार देते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता आधारित राजनीति को महत्व देती है।

मुख्यमंत्री की बोरा से हालिया मुलाकात ने भी अटकलों को बल दिया है। हालांकि आधिकारिक रूप से अभी तक किसी तिथि या कार्यक्रम की पुष्टि नहीं हुई है।

समर्थकों से राय-मशविरा

बोरा ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने समर्थकों और क्षेत्र के लोगों से विचार-विमर्श करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संगठन के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर उनकी असहमति रही है।

पुराने मतभेद भी चर्चा में

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि टिकट वितरण को लेकर विवाद, क्षेत्रीय समीकरण और पूर्व गठबंधनों पर मतभेद जैसी बातें इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में रही हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में All India United Democratic Front (AIUDF) के साथ गठबंधन को लेकर भी बोरा ने पहले असहमति जताई थी।

क्या बदलेगा समीकरण?

यदि बोरा राजनीतिक पाला बदलते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है और भाजपा को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है। फिलहाल असम की राजनीति में कयासों का दौर जारी है और सभी की नजर बोरा के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।

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