नई दिल्ली: अब रेल यात्रा का अनुभव हर यात्री के लिए समान होगा। भारतीय रेलवे ने आम यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि फर्स्ट क्लास और एसी कोच जैसी सफाई अब जनरल डिब्बों में भी लागू होगी। अक्सर यात्रियों की यह शिकायत रहती थी कि जनरल कोच में गंदगी और बदबू सामान्य हैं, लेकिन अब यह स्थिति पूरी तरह बदलने जा रही है।
जनरल कोच पर विशेष फोकस
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेल मंत्रालय के ‘रिफार्म प्लान 2026’ के तहत सफाई व्यवस्था में कोई भेदभाव नहीं होगा। योजना के तहत अगले 52 हफ्तों में 52 अहम सुधार लागू किए जाएंगे, जिनमें सफाई सबसे पहला कदम है।
अब ट्रेन के रुकते ही स्टेशनों पर सफाई कर्मचारी सीधे जनरल डिब्बों में प्रवेश करेंगे और टॉयलेट, कचरा डिब्बे और पूरे कोच की सफाई करेंगे। शुरुआत में हर जोन की 4-5 ट्रेनों में यह व्यवस्था लागू होगी और बाद में इसे बड़े पैमाने पर 80-80 ट्रेनों के समूह में विस्तारित किया जाएगा।
AI निगरानी से होगी हर कोच की पैनी जांच
सिर्फ सफाई का दिखावा अब बर्दाश्त नहीं होगा। इसके लिए रेलवे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली शुरू की है। सफाई के बाद कोच की तस्वीरें सीधे सेंट्रल कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जहाँ AI यह सुनिश्चित करेगा कि सफाई तय मानकों के अनुसार हुई है या नहीं। अगर कहीं भी कमी पाई गई, तो संबंधित वेंडर या ठेकेदार पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में सफाई के ठेके केवल उन्हीं कंपनियों को मिलेंगे जिनका ट्रैक रिकॉर्ड उत्कृष्ट होगा।
पीक समय में यात्रियों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाएगा ताकि हर यात्री को साफ-सुथरा और आरामदायक माहौल मिल सके।
कार्गो टर्मिनल्स में नई रफ्तार
सिर्फ यात्री सुविधा ही नहीं, रेलवे ने कार्गो व्यवसाय में भी बड़े सुधार की योजना बनाई है। गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल्स के कॉन्ट्रैक्ट की अवधि 35 साल से बढ़ाकर 50 साल कर दी गई है। देश भर में अब तक 124 कार्गो टर्मिनल बन चुके हैं, जिससे रेलवे को 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। अगले पांच सालों में 500 से अधिक टर्मिनल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अनुमान है कि अगले तीन सालों में रेलवे को 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी, जो लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी क्रांति लाएगी।