दुर्ग। 14 फरवरी/नगर पालिक निगम द्वारा आयोजित आठवां फ्लावर शो शनिवार को बड़ी धूमधाम से आरंभ हुआ। सुबह 11 बजे जैसे ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, पूरा राजेन्द्र पार्क रंग-बिरंगे फूलों की खूबसूरती से खिल उठा। सुबह से लेकर देर रात तक लोगों की भारी भीड़ उमड़ती रही। परिवार, बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस अनोखी पुष्प प्रदर्शनी का आनंद लेने पहुंचे।
ऑपरेशन सिंदूर रंगोली बना शो का मुख्य आकर्षण
फ्लावर शो में ऑपरेशन सिंदूर रंगोली ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। फूलों और प्राकृतिक रंगों से बनी यह विशाल रंगोली हर किसी की सेल्फी का बैकग्राउंड बन गई। रंगोली के सामने फोटो खिंचवाने और वीडियो बनाने की लोगों में होड़ लगी रही।फूलों का मनमोहक संसार: प्रदर्शनी में दिखीं अनोखी आकृतियाँ

कार्यक्रम में सैकड़ों प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों की प्रदर्शनी लगाई गई। विभिन्न कलात्मक आकृतियों फूलों से बना बादक, प्राकृतिक आकृतियाँ, फूलों के आकर्षक ढांचे ने आगंतुकों को खूब लुभाया। प्यारी खुशबू के साथ इन फूलों की सजावट ने पूरे पार्क को एक उत्सव स्थल का रूप दे दिया।
बच्चों की कला और उत्साह ने बढ़ाई शो की चमक
बच्चों के लिए आयोजित ड्राइंग में पर्यावरण पर आधारित रंगीन कलाकृतियाँ देखने मिलीं। वहीं चाक से दीए बनाने के स्टॉल ने बच्चों को खूब आकर्षित किया। बच्चों की लंबी कतारें और उनके उत्साह को देखकर कार्यक्रम स्थल पूरी तरह जीवंत लगा।

गीत-संगीत और लोक संस्कृति का मनभावन संगम
फ्लावर शो में मनोरंजन के लिए गीत-संगीत का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्कूली बच्चों और कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति पर आधारित शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। पारंपरिक वेशभूषा और लोक धुनों ने माहौल को और भी रंगीन बनाया।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की विशेष उपस्थिति रही साथ ही कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे जिनमें स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव,सांसद विजय बघेल,महापौर अल्का बाघमार,आयुक्त सुमित अग्रवाल,सभापति श्याम शर्मा,पर्यावरण प्रभारी काशीराम कोसरे के अलावा एमआईसी सदस्य, पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा भारी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

इन सभी ने फूलों की प्रदर्शनी, शासन योजनाओं से जुड़े मॉडलों और अन्य स्टॉलों का अवलोकन कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
पर्यावरण संदेश से जुड़ी प्रदर्शनी बनी आकर्षण फ्लावर शो में पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से संबंधित कई प्रदर्शनी लगाई गईं। स्वच्छता पर आधारित स्लोगन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े और पारंपरिक कला पर आधारित स्टॉलों ने आगंतुकों को खूब आकर्षित किया।