RBI का राहत भरा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर स्थिर, कर्ज पर नहीं बढ़ेगा बोझ

नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025–26 के लिए महंगाई को लेकर अपने आकलन में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल देश में महंगाई का दबाव सीमित दायरे में बना हुआ है। 6 फरवरी को हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में केंद्रीय बैंक ने FY26 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई करीब 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया।

RBI के अनुसार, बीते कुछ महीनों में महंगाई में स्पष्ट गिरावट देखने को मिली है। गवर्नर ने बताया कि नवंबर और दिसंबर के दौरान महंगाई दर RBI के निर्धारित टॉलरेंस लेवल से नीचे रही, जिससे कीमतों में स्थिरता का संकेत मिलता है।

आने वाले समय में महंगाई में धीरे-धीरे बढ़त संभव

हालांकि पूरे FY26 में महंगाई अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगले वित्त वर्ष की शुरुआत तक कीमतों में मामूली तेजी देखी जा सकती है।

  • FY26 की अंतिम तिमाही में महंगाई 3.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
  • FY27 की पहली तिमाही में यह 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में करीब 4.2 प्रतिशत रह सकती है।

RBI का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की ऊंची कीमतें और घरेलू मांग में सुधार इस बढ़त की प्रमुख वजह हो सकते हैं।

नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं

मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से सभी प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया है।

  • रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बना रहेगा।
  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) 5 प्रतिशत
  • बैंक रेट 5.5 प्रतिशत

केंद्रीय बैंक का मानना है कि मौजूदा दरें महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास, दोनों को संतुलित रूप से समर्थन देने के लिए उपयुक्त हैं। RBI ने अपनी न्यूट्रल पॉलिसी स्टांस भी कायम रखी है, यानी आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत

RBI ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार संतोषजनक बनी हुई है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार समझौते आने वाले वर्षों में विकास को मजबूती दे सकते हैं।

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक जोखिमों को लेकर सतर्कता भी जताई है। RBI ने भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने के लिए बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध कराई जाएगी।

नई GDP और महंगाई सीरीज़ की तैयारी

इसके साथ ही RBI ने संकेत दिया है कि जल्द ही GDP और महंगाई से संबंधित नई डेटा सीरीज़ जारी की जाएगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति का और सटीक आकलन किया जा सकेगा।

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