Yoni Mudra Benefits: तेज़ रफ्तार जीवनशैली में लगातार बना रहने वाला तनाव अब केवल मानसिक परेशानी नहीं रह गया है, बल्कि यह हार्मोनल असंतुलन, थकान, नींद की कमी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट जैसी समस्याओं की जड़ बनता जा रहा है। ऐसे हालात में योग को संतुलन का प्राकृतिक माध्यम माना जाता है। आयुष मंत्रालय भी नियमित योग अभ्यास को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता है। इन्हीं योग अभ्यासों में एक है योनि मुद्रा, जिसे सरल होने के बावजूद प्रभावशाली माना जाता है।
आयुष विशेषज्ञों के अनुसार, योनि मुद्रा ध्यान और श्वास पर आधारित एक ऐसी प्रक्रिया है, जो व्यक्ति को बाहरी भागदौड़ से अलग कर भीतर की शांति से जोड़ती है। इसे सुखासन या पद्मासन में बैठकर किया जाता है, जहां आंखें बंद कर सांसों की गति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस अभ्यास के दौरान हाथों की विशेष स्थिति मन को एकाग्र करने में मदद करती है, जिससे तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है।
नियमित अभ्यास से मन धीरे-धीरे स्थिर होने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब मानसिक बेचैनी कम होती है, तो शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन भी संतुलन में आने लगते हैं। इसी कारण योनि मुद्रा उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जो लंबे समय से चिंता, घबराहट या मानसिक दबाव महसूस करते हैं।
हार्मोनल स्वास्थ्य के संदर्भ में भी इस मुद्रा को महत्वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर महिलाओं में हार्मोन असंतुलन का असर मासिक चक्र, मूड और ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। नियमित योग और ध्यान से शरीर की आंतरिक ग्रंथियों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है, जिससे संतुलन बनाने में मदद मिलती है। पुरुषों के लिए भी यह अभ्यास लाभकारी बताया जाता है, क्योंकि यह तनावजनित हार्मोनल उतार-चढ़ाव को शांत करने में सहायक है।
इसके अलावा, योनि मुद्रा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करने में सहायक मानी जाती है। जब मन शांत होता है और ऊर्जा प्रवाह संतुलित रहता है, तो शरीर बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। यही वजह है कि इसे संपूर्ण स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है।
एकाग्रता बढ़ाने के लिहाज से भी यह मुद्रा प्रभावी मानी जाती है। आज के समय में पढ़ाई, काम और रोज़मर्रा की जिम्मेदारियों के बीच ध्यान भटकना आम हो गया है। योनि मुद्रा के अभ्यास से सोच में स्पष्टता आती है, निर्णय क्षमता मजबूत होती है और कार्यक्षमता में सुधार महसूस किया जा सकता है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार, थायरॉइड और पीसीओडी जैसी समस्याओं में भी यह मुद्रा सहायक भूमिका निभा सकती है, क्योंकि यह तनाव कम कर शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बेहतर बनाती है। मासिक धर्म की अनियमितता जैसी समस्याओं में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग को सहायक उपाय के रूप में अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है।