नवा रायपुर। विष्णु देव साय और सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री पाटिल वर्चुअली बैठक में शामिल हुए। इस दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिलों के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में संचालित कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संकट 21वीं सदी की गंभीर पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी है। उन्होंने जल संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी को अनिवार्य बताया। साय ने नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी को प्रसाद के समान मानते हुए उसके प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया और कई जिलों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार मिले। सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का व्यापक निर्माण किया गया। वर्तमान में प्रदेश में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में पांच ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।

साय ने कहा कि दूसरे चरण में तकनीक आधारित और परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ सिंचाई और मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने बताया कि सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट और जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को दिनचर्या का हिस्सा बनाने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान किया।
केंद्रीय मंत्री पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के प्रयासों और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि गत वर्ष राज्य देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2024 में सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, जल शक्ति मंत्रालय के सचिव कांताराव सहित प्रदेश के सभी कलेक्टर वर्चुअली उपस्थित थे।